बारह राजकुमारियों की कहानी | 12 dancing Princess Story In Hindi

फ्रेंड्स, इस पोस्ट में हम बारह राजकुमारियों की कहानी (12 dancing Princess Story In Hindi) शेयर कर रहे हैं. यह एक जर्मन परी कथा (German Fairy Tale) है, जो बारह राजकुमारियों के जूते रोज़ फट जाने के रहस्य से संबंधित है. राजकुमारियों के जूते कैसे फट जाते थे? क्या इस रहस्य से पर्दा उठ पाया? यही इस कहानी में बताया गया है. पढ़िए पूरी कहानी :

12 dancing Princess Story In Hindi

12 dancing Princess Story In Hindi
12 dancing Princess Story In Hindi | Image : flickr, licence

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बहुत समय पहले की बात है. एक राज्य में एक राजा राज किया करता था. उसकी बारह पुत्रियाँ थी. सभी बहुत सुंदर थी. वह सबसे बहुत प्रेम करता था. इसलिए उनकी सुरक्षा का विशेष ख्याल रखता था.

किसी भी राजकुमारी को महल से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी. वे हर समय कड़ी सुरक्षा में रहती थीं. कुछ सैनिक हर समय उनके आस-पास रहते, ताकि उन पर किसी तरह का खतरा न आ सके.

राजुमारियाँ के रहने की व्यवस्था एक ही कक्ष में थी. रात में उनके सोने जाते ही वह कक्ष बाहर से बंद कर दिया जाता था. ताकि न वे कक्ष से बाहर निकल सकें, न ही कोई उनके कक्ष में प्रवेश कर सके. कक्ष के बाहर सैनिक तैनात रहते थे.

लेकिन इतनी सुरक्षा के बाद भी जब राजा सुबह राजकुमारियों से मिलता, तो उनके जूते फ़टे हुए होते थे. राजा हैरान रह जाता. पूछने पर राजकुमारियाँ कहती कि उन्हें भी नहीं पता कि उनके जूते कैसे फ़ट गए? हर दिन राजकुमारियों के लिए नए जूते लेने पड़ते.  

हर दिन राजकुमारियों के जूतों का फ़टना राजा के लिए एक रहस्य बनता जा रहा था. वह चाहता था कि इस रहस्य का पर्दाफाश हो. इसलिए अपने स्तर पर उसने कई प्रयास किये, लेकिन सफ़ल नहीं हो सका.

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अंत में उसने राज्य में यह घोषणा करवा दी कि जो व्यक्ति तीन दिनों में राजकुमारियों के जूते फ़टने के कारण का पता लगा लेगा, उसका विवाह उसकी मनपसंद राजकुमारी से करवा दिया जायेगा. साथ ही उसे राजा का उत्तराधिकारी भी घोषित कर दिया जायेगा. लेकिन इस कार्य में असफ़ल रहने पर उसका सिर धड़ से अलग कर दिया जायेगा.

यह घोषणा पड़ोसी राज्यों तक भी पहुँची और पड़ोसी राज्यों के राजकुमार इस रहस्य का पता लगाने राजा के पास आने लगे. राजा उन्हें राजकुमारियों के कक्ष के साथ वाले कक्ष में ठहराता, ताकि उन्हें निगरानी करने में कोई असुविधा ना हो. लेकिन रात होते ही राजकुमार गहरी नींद में सो जाते और सुबह होने पर देखते कि राजकुमारियों के जूते फ़टे हुए हैं.

कई राजकुमारों को रहस्य का पता न लगा पाने के कारण अपने प्राण देने पड़े. अब राजकुमार भी अपने प्राणों के भय से इस रहस्य का पता लगाने में हिचकने लगे. राजा निराश हो गया. उसे लगने लगा कि अब यह रहस्य सदा रहस्य ही बना रहेगा.

उस राज्य के एक गाँव में एक गरीब युवक रहता था. एक दिन जब उसने राजा की घोषणा सुनी, तो वह राजकुमारी से विवाह के सपने देखने लगा. उसने सोचा कि गरीबी में जीवन यापन करने से अच्छा है कि इस रहस्य का पता लगाने में हाथ अजमाया जाए. सफ़ल रहा, तो राजकुमारी से विवाह के साथ-साथ राज्य का उत्तराधिकारी भी बन जायेगा. अन्यथा, इस गरीबी के जीवन से तो मृत्यु ही भली.

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अगले दिन उसने एक पोटली में उसने कुछ रोटियाँ बांध ली और पैदल ही राजमहल की ओर निकल पड़ा. बिना रुके वह चला जा रहा था. शाम तक उसे किसी भी हालत में राजमहल पहुँचना था.

चलते-चलते दोपहर हो गई और उसे भूख लग आई. वह थक भी चुका था. इसलिए एक पेड़ ने नीचे भोजन करने और सुस्ताने के लिए बैठ गया. लेकिन जैसे ही उसने खाने के लिए पोटली खोली, एक बूढ़ी औरत वहाँ आ गई और उसने उससे खाना मांगा.

युवक भूख से बेहाल था, लेकिन दयावश उसने अपनी सारी रोटियाँ उस बूढ़ी औरत को दे दी. रोटियाँ खाकर वह औरत तृप्त हो गई और उसने युवक को ढेर सारा आशीर्वाद दिया. पूछने पर युवक ने उसे बताया कि वह राज्य की बारह राजकुमारियों के जूते फ़टने के रहस्य का पता लगाने जा रहा है.

तब बूढ़ी औरत ने उसे एक टोपी दी और बोली, “बेटा, ये कोई साधारण टोपी नहीं है. ये एक जादुई टोपी है. इसे तुम जब भी पहनोगे, अदृश्य हो जाओगे. हो सकता है, ये तुम्हारे काम आये. और हाँ, मेरी एक बात याद रखना, यदि राजकुमारियाँ तुम्हें कुछ भी खाने-पीने को दे, तो उसे मत खाना.”

टोपी लेकर युवक ने बूढ़ी औरत से विदा ली और महल की ओर चल पड़ा. शाम होते तक वह महल पहुँच गया. महल के द्वारपाल द्वारा उसे राजा के समक्ष ले जाया गया. उसने राजा को अपने आने का प्रयोजन बताया, तो राजा के राजकुमारियों के कक्ष के निकट एक कक्ष में उसके रहने की व्यवस्था कर दी.

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रात में युवक अपने कक्ष में बैठा हुआ था कि सबसे बड़ी राजकुमारी शरबत लेकर उसके पास आई और उसे देते हुए बोली, “मैं यह शरबत भेंट कर आपका महल में स्वागत करती हूँ. आपने ऐसा शरबत पहले कभी नहीं पिया होगा.”

इतनी सुंदर राजकुमारी को देख युवक कुछ कह ही नहीं पाया और बूढ़ी औरत द्वारा दी गई चेतावनी भूल गया. शरबत का गिलास हाथ में लेकर वह उसे एक बार में ही गटक गया. राजकुमारी मुस्कुराते हुए चली गई.

राजकुमारी के जाते ही शरबत ने अपना असर दिखाया और युवक नींद के आगोश में समाने लगा. वास्तव में उस शरबत में नींद की दवा मिली हुई थी.

रात भर युवक गहरी नींद में सोता रहा. सुबह उठकर जब वह राजा के पास गया, तो उसे पता चला कि बारह राजकुमारियों ने जूते फटे हुए हैं. राजा ने उसे चेताया कि अब उसने पास मात्र दो दिन का समय शेष है. इन दो दिनों में यदि उसने राजकुमारियों के जूते फ़टने के रहस्य का पता नहीं लगाया, तो उसका सिर धड़ से अलग कर दिया जायेगा.

युवक को अपनी गलती का अहसास था. उसने तय किया कि वह आज की पूरी रात जागेगा और बूढ़ी औरत की दी हुई जादुई टोपी पहनकर राजकुमारियों के कक्ष में जाकर निगरानी करेगा.   

रात हुई, तो सबसे छोटी राजकुमारी शरबत लेकर युवक के पास आ गई. सारी राजकुमारियों में वह सबसे सुंदर थी. उसने जब शरबत का गिलास आगे बढ़ाया, तो युवक फिर बूढ़ी औरत की चेतावनी भूल गया. उस रात भी शरबत पीकर वह गहरी नींद सोया.

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सुबह उठने पर उसे फिर से अपनी गलती का अहसास हुआ. राजा ने उसे बुलाकर अंतिम चेतावनी दे दी कि इस रात रहस्य का पता न लगा पाने पर वह अगली सुबह अपने प्राण गंवा देगा.

अब युवक के सामने करो या मरो की स्थिति थी. उसे उस रात हर हाल में जागना था और राजकुमारियों के जूते फ़टने के रहस्य का पता लगाना था.

रात में फिर से छोटी राजकुमारी शरबत लेकर उसके पास आई. लेकिन इस बार वह सावधान था. उसने शरबत का गिलास ले तो लिया, लेकिन पिया नहीं. राजकुमारी के जाने के बाद उसने शरबत खिड़की से बाहर फेंक दिया.

शरबत न पीने के कारण इस बार उसे नींद नहीं आई. देर रात वह बूढ़ी औरत की दी दुई जादुई पहनकर बारह राजकुमारियों के कमरे में चला गया. जादुई टोपी के कारण वह अदृश्य था. कोई उसे देख नहीं पा रहा था, लेकिन वह सब कुछ देख रहा था.

उसने देखा कि सभी राजकुमारियाँ सुंदर वस्त्र और नए जूते पहनकर सज-धजकर तैयार हैं. युवक ये देख हैरान था. उसे समझ नहीं आ रहा था कि रात के इस पहर राजकुमारियाँ इतनी तैयार क्यों हैं?

तभी सबसे बड़ी राजकुमारी सबसे छोटी राजकुमारी से बोली, “जाओ जाकर पता तो करो कि वह युवक सोया है या नहीं?”

छोटी राजकुमारी युवक के कक्ष की ओर की दीवार पर कान लगाकर खड़ी हो गई और उसके खर्राटे सुनने की कोशिश करने लगी. युवक समझ गया कि उसे खर्राटे की आवाज़ निकालनी होगी, ताकि राजकुमारियाँ उसकी ओर से निश्चिंत हो जाए.

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वह अदृश्य अवस्था में दीवार के पास जाकर खर्राटे की आवाज़ निकालने लगा, जिससे छोटी राजकुमारी को लगा कि वह सो गया है. उसने सारी राजकुमारियों को ये खबर दे दी.

फिर सबसे बड़ी राजकुमारी ने बारह बिस्तरों में से एक बिस्तर खिसकाया और तीन बार ताली बजाई. ताली बजाते ही वहाँ की जमीन एक ओर ख़िसक गई. वह एक गुप्त मार्ग था, जहाँ नीचे की ओर सीढ़ियाँ बनी हुई थी.

सभी राजकुमारियाँ एक-एक कर उस गुप्त मार्ग में बनी सीढ़ियों से नीचे उतरने लगी. युवक भी उनके पीछे हो लिया. सीढ़ियाँ ख़त्म होने पर एक घना जंगल पड़ा. उस जंगल में लगे पेड़ों की डालियाँ सुनहरी थी. युवक ने एक सुनहरी डाली तोड़कर अपने पास रख ली.

जंगल पार कर राजकुमारियाँ एक झील के किनारे पहुँची, जहाँ बारह नावों में बारह राजकुमार उनका इतंजार कर रहे थे. सभी राजकुमारियाँ एक-एक नाव में बैठ गई. युवक सबसे छोटी राजकुमारी की नाव में बैठा.

नाव में बैठकर राजकुमारियाँ नदी पार करने लगी. छोटी राजकुमारी को अपनी नाव कुछ भारी प्रतीत हो रही थी. होती भी क्यों ना? युवक उसमें बैठा हुआ था. उसने पास ही एक दूसरी नाव में बैठी अपनी बड़ी बहन को ये बताया, तो वह हंसने लगी और बोली, “लगता है, आज वह नींद में है.”

फिर छोटी राजकुमारी कुछ न बोली. कुछ ही देर में नाव नदी पार पहुँच गई. सभी राजकुमारियाँ राजकुमारों के साथ नाव से उतरीं और आगे बढ़ने लगी. कुछ ही दूर रोशनी से जगमगाता एक शानदार महल था. उस महल में संगीत गूंज रही थी.

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राजकुमारियाँ महल के अंदर चली गई. युवक भी पीछे-पीछे महल में चला गया. वहाँ उसने देखा कि कई युवक और युवतियाँ एक साथ नृत्य कर रहे हैं. राजकुमारियाँ भी राजकुमारों के साथ नृत्य करने लगी. युवक को अब बारह राजकुमारियों के जूते फ़टने का कारण समझ आ चुका था.

वह एक किनारे पर खड़ा होकर सबको नृत्य करते देखने लगा. थोड़ी देर बाद उसे भूख लगने लगी. उसने देखा कि उस कक्ष के एक किनारे पर रखी मेज़ पर ढेर सारे पकवान सजे हुए हैं. उसने एक मिठाई उठाई और अपने मुँह में डाल ली. उसी समय सबसे छोटी राजकुमारी की नज़र उस ओर चली गई और उसने मिठाई को हवा में उड़ते और गायब होते देख लिया.

यह देख वह डर गई. वह सबसे बड़ी राजकुमारी के पास गई और यह बात बताई, तो वह बोली, “लगता है तुम आज खुली आँखों से सपने देख रही हो.”

छोटी राजकुमारी क्या कहती? वह चुप हो गई. इधर युवक ने वहाँ रखे बर्तनों में से एक सुनहरा प्याला उठाया और अपने पास रख लिया.  

राजकुमारियाँ रात भर नृत्य करती रही. फिर सुबह होने पर महल से निकलकर नाव में बैठकर नदी पारकर जंगल से होते हुए सीढ़ियाँ चढ़कर गुप्त द्वार से अपने शयन कक्ष में आ गई. युवक भी उनके पीछे-पीछे वापस आ गया.

कुछ देर में ही राजा का बुलावा आ गया. जब वह दरबार पहुँचा, तो बारह राजकुमारियाँ भी वहाँ उपस्थित थीं. उनके जूते फटे हुए थे.

राजा ने युवक से पूछा, “क्या तुम राजकुमारियों के जूते फ़टने का रहस्य पता लगा पाए? यदि नहीं, तो अपनी अंतिम सांसे ले लो.”

युवक बोला, “महाराज! मैंने इस रहस्य के बारे में पता लगा लिया है.” और उसने रात की पूरी घटना राजा को बता दी. प्रमाण स्वरुप उसने जंगल में पेड़ से तोड़ी सुनहरी डाली और महल से उठाया सुनहरा प्याला राजा के समक्ष प्रस्तुत किया.

राजा ने जब राजकुमारियों से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने भी ये बात स्वीकार कर ली. राजकुमारियों के जूते फ़टने का रहस्य उजागर हो चुका था. राजा ने अपना वचन निभाते हुए युवक से पूछा कि वह किस राजकुमारी से विवाह करना चाहता है. युवक ने सबसे छोटी राजकुमारी से विवाह की इच्छा जताई.

राजा ने युवक का विवाह सबसे छोटी राजकुमारी से करवा दिया और उसे अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. इस तरह अपनी नेकदिली और निडरता से एक साधारण युवक उस राज्य का उत्तराधिकारी बन गया.


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