दो चिड़ियों की कहानी | A Tale Of Two Birds In Hindi

फ्रेंड्स, इस पोस्ट में हम दो चिड़ियों की कहानी (A Tale Of Two Birds In Hindi) शेयर कर रहे हैं. इस कहानी में संगत के असर के संबंध में रोचक ढंग से बताया गया है. ये चिड़िया के दो बच्चों की कहानी है, जो बचपन में एक-दूसरे से बिछड़ जाते हैं और अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग संगत में पलते हैं. संगत उनके जीवन पर क्या प्रभाव डालता है, ये इस बच्चों की इस शिक्षाप्रद कहानी में बताया गया है. पढ़िए पूरी कहानी :   

A Tale Of Two Birds In Hindi

A Tale Of Two Birds In Hindi
A Tale Of Two Birds In Hindi

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जंगल में बरगद के ऊँचे पेड़ पर एक चिड़िया घोंसला बनाकर अपने दो बच्चों के साथ रहती थी. एक दिन एक तूफ़ान आया और बरगद का वह पेड़ गिर गया. पेड़ से दबकर चिड़िया मर गई. लेकिन सौभाग्य से उसके दोनों बच्चे बच गए.

तेज हवा चिड़िया के एक बच्चे को उड़ाकर एक गुफ़ा के पास ले गई, जहाँ डाकू रहा करते थे. चिड़िया का दूसरा बच्चा ऋषि-मुनियों के आश्रम के पास जाकर गिरा. समय बीतने लगा और दोनों बच्चे बड़े होने लगे.

कई महिने बीत चुके थे. एक दिन एक राजा जंगल में शिकार करने आया और रास्ता भटक गया. वह बहुत थका हुआ था. एक स्थान पर उसने अपना घोड़ा रोका और पेड़ की छाया में आराम करने बैठ गया. जहाँ वह आराम कर रहा था, उसके पास ही एक गुफ़ा थी.

राजा ने आँख बंद ही की थी कि जिस पेड़ के नीचे वह आराम कर रहा था, उस पर बैठी चिड़िया बोल पड़ी, “जल्दी आओ…जल्दी आओ…इस आदमी के पास ढेर सारे आभूषण हैं. इसका गला काटकर इसे मार डालो और इसे लूट लो.”

यह सुनकर राजा हैरान रह गया. तभी उसे गुफ़ा के अंदर कुछ आहट महसूस हुई. खतरा भांपते ही वह अपने घोड़े को सरपट दौड़ाता हुआ वहाँ से दूर निकल गया.

वह घोड़ा दौड़ाता-दौड़ाता थक चुका था. आराम करने वह एक पेड़ के नीचे जा बैठा. पास ही एक आश्रम दिखाई पड़ रहा था. उसके नीचे बैठते ही पेड़ की एक डाली पर बैठी चिड़िया बोल पड़ी, “राजन, आपका स्वागत है. इस समय आश्रम में कोई नहीं है. ऋषि बाहर गए हैं. किंतु आप अंदर जाकर आराम करिए. कुछ देर में ऋषि आते होंगे.”

राजा ने सिर उठाकर चिड़िया को देखा, वह हूबहू पहले वाली चिड़िया की तरह ही दिख रही थी. चिड़िया की बात मानकर राजा आश्रम के अंदर चला गया. कुछ देर में ऋषि आश्रम लौट आये. राजा ने उन्हें प्रणाम किया.

ऋषि ने राजा के लिए भोजन-पानी का प्रबंध किया. भोजन के बाद कुछ देर आराम कर राजा जाने को हुआ, तो उसने मन में कौंध रहा प्रश्न ऋषि से पूछ लिया, “गुरूवर, आपके आश्रम के सामने स्थित पेड़ पर जैसी चिड़िया है. हूबहू वैसी ही चिड़िया मैंने कुछ दूरी पर स्थित एक गुफ़ा के पास के पेड़ पर देखी. लेकिन दोनों की बोली में बहुत अंतर था. मैं हैरान हूँ कि एक जैसी चिड़िया होने के बाद भी दोनों में इतना अंतर?”

“राजन! वे दोनों एक ही चिड़िया से जन्मे थे और तूफ़ान में बिछड़ गए थे. एक डाकुओं की गुफ़ा के पास उनके संगत में बड़ी हुई और उनकी बोली सीख ली. एक हम ऋषियों के संगत मे बड़ी हुई और हमारी बोली सीखी. सब संगत खेल है.”

सीख (A Tale Of Two Birds Moral) 

हमारी संगत का हमारे आचरण, व्यवहार और जीवन पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है. इसलिए सोच-समझकर संगत का चुनाव करना चाहिए, क्योंकि जैसी संगत वैसी रंगत.   


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