अंधी का बेटा दिल को छूने वाली कहानी | Andhi Ka Beta Emotional Story In Hindi

फ्रेंड्स, अंधी का बेटा दिल छूने वाली कहानी (Andhi Ka Beta Emotional Story In Hindi) इस पोस्ट में शेयर कर रहे हैं। Andhi Maa Aur Bete Ki Kahani माता पिता का सम्मान करना सिखाती है। 

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Andhi Ka Beta Emotional Story In Hindi 

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Andhi Ka Beta Story In Hindi
Andhi Ka Beta Emotional Story In Hindi

एक कस्बे में एक विधवा अंधी औरत रहती थी। उसका एक बेटा था, जिसके पालन पोषण की सारी जिम्मेदारी उसके कंधों पर थी। वह अपने बेटे को पढ़ा लिखा कर एक बहुत बड़ा आदमी बनाना चाहती थी। इसलिए उसने उसका दाखिला कस्बे के सबसे अच्छे स्कूल में किया। वह दिन रात मेहनत करती, ताकि बेटे की स्कूल की फीस दे सके।

लड़के के स्कूल के बच्चे उसकी मां के बारे में जानते थे। वे सब उसे अंधी का बेटा कहकर चिढ़ाते थे। लड़का इससे बहुत परेशान था। उसे अपनी मां पर शर्म आने लगी थी। वह उसके साथ कहीं भी आने जाने से कतराने लगा था।

जब लड़का बड़ा हुआ, तो उसकी शहर में अच्छी नौकरी लग गई। उसने अपनी मां से वादा किया कि शहर में मकान लेकर वह उसे लेने आएगा। लेकिन वह शहर गया, तो फिर लौटकर वापस नहीं आया। उसकी अंधी मां उसका इंतज़ार करती रह गई।

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कई महीने बीत गए। लड़के की कोई खबर नहीं आई। कई महीने बीत गए। लड़के की कोई खबर नहीं आई। अंधी एक दिन उससे नहीं रहा गया और वह बेटे से मिलने शहर पहुंच गई। पूछते-पूछते वह बेटे के ऑफिस पहुंची। वहां सिक्योरिटी गार्ड ने उसे रोक दिया। अंधी औरत ने गार्ड को अपने बेटे का नाम बताया और बोली कि उससे जाकर कह दो कि गांव से कोई मिलने आया है।

गार्ड ने जाकर उसके बेटे को बताया। बेटे ने ऑफिस की खिड़की से देखा, तो उसे अपनी मां गेट के बाहर खड़ी नज़र आई। वह ऑफिस में सबके सामने अपनी मां की वजह से शर्मिंदा नहीं होना चाहता था। उसने कहला दिया कि वह ऑफिस में नहीं है।

अंधी औरत वहां से चली गई।

शाम को वह लड़का ऑफिस से घर जाने के लिए निकला। रास्ते में एक जगह काफ़ी भीड़ जमा थी। वह अपनी गाड़ी रोककर भीड़ के पास पहुंचा और तो बीच सड़क में अपनी मां को मारा पाया। उसके हाथ में एक चिट्ठी थी, जिसमें लिखा था :

बेटा,

बड़े दिन हो गए थे, तेरी कोई खबर नहीं मिली। चिंता हो रही थी, इसलिए तुझसे मिलने चली आई। तू तो अब बड़ा आदमी बन गया है। तूझसे मिलना अब शायद मुझ गरीब की किस्मत में नहीं। लेकिन मैं बहुत खुश हूं तेरे लिए। तूने अपना ही नहीं मेरा सपना भी पूरा किया। मलाल है कि तेरी तरक्की देख नहीं सकती। काश! बचपन में तेरी आंखों में सरिया न घुसा होता और मुझे तुम्हें अपनी आंखें न देनी पड़ी होती, तो तेरी तरक्की अपनी आंखों से देखकर सुकून से मरती।

तेरी अंधी मां

ये पढ़कर लड़का फूट फूट कर रोने लगा। जिस अंधी मां पर उसे शर्म आती थी, उसने उसके लिए कितना बड़ा बलिदान किया था। वह आत्म ग्लानि से भर उठा और जिंदगी भर खुद को माफ नहीं कर पाया।

सीख (Moral Of Mother Son Emotional Story In Hindi)

दोस्तों, माता-पिता अपने बच्चों के लिए अपना सर्वस्व निछावर कर देते हैं। उनका हमेशा सम्मान करना चाहिए।

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