चटोरी भानुमती : आंध्र प्रदेश की लोक कथा | Chatori Bhanumati Folk Tale Of Andhra Pradesh In Hindi

फ्रेंड्स, इस पोस्ट में हम आंध्र प्रदेश की लोक कथा “चटोरी भानुमती” (Chatori Bhanumati Andhra Pradesh Ki Lok Katha) शेयर कर रहे है. ये लोक कथा रामलिंग नामक एक किसान और उसकी चटोरी नौकरानी भानुमती की है। भानुमती के चटोरेपन से कैसे मज़ेदार स्थति उत्पन्न होती है, यह इस कहानी में बताया गया है. 

Chatori Bhanumati Andhra Pradesh Ki Lok Katha

Chatori Bhanumati Andhra Pradesh Ki Lok Katha
Chatori Bhanumati Andhra Pradesh Ki Lok Katha

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आंध्र प्रदेश के एक गाँव में रामलिंग नामक एक किसान रहता था। कई वर्ष पूर्व उसकी पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी। पत्नी की मृत्यु के बाद खाना बनाने और अन्य घरेलू कार्यों में उसे कठिनाई उत्पन्न होने लगी। इसलिए उसने एक नौकरानी रख ली, जिसका नाम भानुमती था।

भानुमती घरेलू कार्य में दक्ष थी। साफ-सफाई हो, जानवरों की देखभाल हो, खाना बनाना हो या कपड़े धोना हो, वह सारे काम उचित रीति से किया करती थी। उसमें एकमात्र कमी ये थी कि वह बहुत चटोरी किस्म की स्त्री थी। वह जब तब घर की खाने पीने की चीजें चट कर जाया करती थी।

प्रारंभ में तो रामलिंग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। किंतु, जब उसने देखा कि घर से खाने-पीने की चीज़ें गायब हो रही है, तो उसे भानुमती पर संदेह हुआ. उसने उसकी निगरानी की, तो उसका संदेह सत्य साबित हुआ।

उसने भानुमती को चेताया, किंतु भानुमति का अपनी चटोरी जुबान पर नियंत्रण ही नहीं था। खाने की महक आते ही वह खाने पर टूट पड़ती। तंग आकर एक दिन रामलिंग ने उसे बुलाया और अंतिम चेतावनी देते हुए कहा, “भानुमती! अब तुम खाने पीने की चीज़ों पर हाथ साफ़ करती हुई पकड़ी गई, तो नौकरी से हाथ धो बैठोगी।“

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चेतावनी मिलने के बाद से भानुमति संभल कर रहने लगी। कुछ दिनों तक रामलिंग को किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं हुई। उसे लगा कि भानुमती सुधर गई है। एक दिन वह बाजार से बहुत ही रसीले ‘जहांगीर’ आम खरीद कर लाया। उस शाम उसका एक मित्र घर आने वाला था।

शाम को उसने भानुमति को आम देते हुए कहा, “भानुमती! ये लो ये आम। इसके छिलके उतारकर काट दो। जब मेरा दोस्त आयेगा, तो हम दोनों मिलकर इसे खायेंगे।“

भानुमति ने आम ले लिया और चाकू निकालकर आम काटने लगी। उसे आम बहुत पसंद दे। आम काटते हुए उसका जी ललचाने लगा। उसने स्वयं पर नियंत्रण रखने का बहुत प्रयत्न किया, किंतु नहीं कर पाई और आम काटते-काटते ही उसे पूरा खा गई।

आम खा लेने के बाद वह डर गई कि जब रामलिंग को पता चलेगा, तो वह उसे नौकरी से निकाल देगा। वह किसी तरह से ख़ुद को और अपनी नौकरी को बचाने का उपाय सोचने लगी।

थोड़ी देर बाद वह रामलिंग के पास गई और उसे एक चाकू देते हुए बोली, “मालिक! इस चाकू की धार मंद हो गई। इससे आम के छिलके से ठीक से उतर नहीं रहे हैं। इसकी धार तेज कर दो।“

रामलिंग चाकू की धार तेज करने लगा। उसी समय उसका मित्र आ गया। भानुमती ने दरवाज़ा खोला और वहीं से रामलिंग की ओर संकेत कर बोली, “आप यहाँ से भाग जाइये। मालिक जाने क्यों क्रोधित हैं और आपकी नाक काटने की तैयारी कर रहे हैं। देखिये चाकू की धार तेज कर रहे हैं।“

यह देख रामलिंग का मित्र डर गया और वहाँ से भाग गया। दरवाज़े की आहट रामलिंग ने सुन ली थी। वह बाहर आया और भानुमति से पूछा, “कौन आया था?”

भानुमति बोली, “आपके मित्र आये थे और मुझसे आम छीनकर भाग गये। वो देखिये भागे चले जा रहे हैं।“

यह सुनकर रामलिंग चाकू हाथ में लिए ही अपने मित्र के पीछे यह चिल्लाते हुए दौड़ा, “मित्र आधा मुझे तो देता जा।“

रामलिंग की बात जब उसके मित्र के कानों में पड़ी, तो उसने सोचा कि रामलिंग उसकी आधी नाक मांग रहा है। इसलिए वह और तेजी से भागने लगा। कुछ दूर तक रामलिंग ने उसका पीछा किया। फिर थक-हारकर घर लौट आया। उधर भानुमति आम चट करके अगली चोरी की तैयारी करने लगी।

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