दर्जी की सीख शिक्षाप्रद कहानी | Darji Ki Seekh Kahani

दोस्तों, इस पोस्ट में हम दर्जी की सीख शिक्षाप्रद कहानी (Darji Ki Seekh Kahani) शेयर कर रहे हैं। यह Achche Karm Par Kahani है, जिसमें दर्जी Sui Aur Kanchi के उदाहरण द्वारा अपने बेटे को अच्छे कर्म करने की शिक्षा देता है।  पढ़ें:

Darji Ki Seekh Story In Hindi 

Darji ki seekh
Darji Ki Seekh Moral Story

एक गाँव में एक दर्जी रहता था। उसका एक ही बेटा था। वह उसे भी अपना हुनर सिखाना चाहता था। इसलिए एक दिन वह उसे अपने साथ दुकान पर ले आया। 

वहाँ पहुँचकर दर्जी कपड़े सीने लगा और लड़का एक कोने में बैठकर ध्यान से उसे देखने लगा। 

उसने देखा कि दर्जी ने पहले कपड़ा लिया और उसे कैंची की सहायता से सही आकार में काटा। फिर कैंची को अपने पैर के नीचे दबा कर रख लिया। उसके बाद उसने सुई में धागा डाला और कपड़े सीने लगा। कपड़े सीने के बाद उसने सुई को अपनी टोपी में फंसा दिया।

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लड़का दिन भर अपने पिता को कपड़े सीते देखता रहा। इस दौरान उसने हर बार दर्जी को कपड़े काटकर कैंची पैर के नीचे दबाते और कपड़े सीकर सुई को टोपी में फंसाते देखा। उसे इसका कारण समझ नहीं आया। जिज्ञासा के कारण उसने पूछ ही लिया, “पिताजी! आप कपड़ा काटकर कैंची को पैर के नीचे दबाते है और कपड़ा सीकर सुई को टोपी में फंसा देते हैं. इसका कारण क्या है?”

दर्जी बोला, “बेटा, ऐसा दोनों के काम के कारण हैं। कैंची का काम काटना है और सुई का काम जोड़ना। जोड़ने वाले का स्थान हमेशा काटने वाले से ऊपर होता है। इसलिए कैंची का स्थान पैर के नीचे और सुई का स्थान सिर पर पहनी टोपी पर है।”

सीख (Tailor And Son Story Moral)

हमारे कर्म ही समाज में हमारा स्थान निर्धारित करते हैं। यदि हम अच्छे कर्म करेंगे, तो समाज में ऊंचा स्थान प्राप्त करेंगे, लोगों की दृष्टि में हमारा सम्मान बढ़ेगा। वहीं बुरे कर्म के कारण हम लोगों की नज़रों से गिर जायेंगे। इसलिए बुरे कर्मों से दूर रहें और सदा अच्छे कर्म करें।

Darji Ki Seekh Hindi Kahani Video

 

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