भाई जैसा : अकबर बीरबल की कहानी | Funny Akbar Birbal Story In Hindi

मित्रों, इस “Funny Akbar Birbal Story” में अकबर के मुँहबोले भाई अकबर से बीरबल जैसे सलाहकार की मांग करते हैं. यह ज़िम्मेदारी अकबर बीरबल को सौंप देते हैं. बीरबल कैसा सलाहकार ढूंढकर लाता है और अकबर की प्रतिक्रिया क्या रहती है? यही इस कहानी में बताया गया है. पढ़िए पूरी कहानी :

Funny Akbar Birbal Story Hindi

Funny Akbar Birbal Story
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अकबर जब दुधमुँहे थे, उस समय उनकी माँ की मृत्यु हो गई थी. ऐसे में अकबर को महल की एक दासी दूध पिलाया करती थी. उस दासी का अकबर की ही आयु का एक पुत्र था, जिसका नाम हुसिफ़ था.

हुसिफ़ अकबर का दूधभाई था. इसलिए वे उससे सगे भाई जैसा स्नेह करते थे. दोनों साथ-साथ बड़े हुए. बड़े होने के बाद अकबर भारत के शहंशाह बने. लेकिन हुसिफ़ अपनी बुरी संगत के कारण कुछ न बन सका. वह हमेशा जुआरियों के अड्डे पर रहता और पैसा पानी की तरह बहाया करता था.

धीरे-धीरे उसके पास का सारा पैसा ख़त्म हो गया और अय्याशी के लिए उसके पास कुछ भी न बचा. एक दिन उसके जुआरी दोस्तों में उसे सुझाया कि अकबर उसके दूधभाई हैं. उसे मदद के लिए उनके पास जाना चाहिये.

अपने दोस्तों की सलाह मान हुसिफ़ अकबर के दरबार पहुँच गया. हुसिफ़ को देखते ही अकबर को अपना बचपन याद आ गया और वे बहुत ख़ुश हो गये. उन्होंने हुसिफ़ को अपने गले लगाया और उसके आने का प्रयोजन पूछा.

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हुसिफ़ अपनी गरीबी का दुखड़ा अकबर के सामने रोने लगा. उसका दुखड़ा सुनने के बाद अकबर ने उसे अपने दरबार में नौकरी दे दी. उसके रहने के साथ ही नौकर-चाकर और घोड़ा-गाड़ी की भी व्यवस्था कर दी. हुसिफ़ ने अब तक ऐसी रईसी की जिंदगी नहीं देखी थी. वह बड़े मज़े और आराम से अपने दिन काटने लगा.

एक दिन अकबर हुसिफ़ का हाल जानने उसके पास पहुँचे और उससे बोले, “हुसिफ़ भाई! तुम ख़ुश तो हो ना? कोई ज़रूरत तो नहीं है? यदि कोई और ज़रूरतें हो, तो बताने में हर्ज़ मत करना.”

अकबर की इस बात पर हुसिफ़ तपाक से बोला, “आपने अपने सगे भाई जैसा मेरा ख्याल रखा है. किसी चीज़ की कमी नहीं रखी. इन सबके लिए मैं आपका अहसानमंद हूँ. और किसी चीज़ की तो ज़रुरत मुझे है नहीं, बस सोचता हूँ कि काश बीरबल जैसा सलाहकार मेरे पास भी होता.”

“ज़रूर, तुम्हारी ये ख्वाहिश हम ज़रूर पूरी करेंगे.” अकबर ने हुसिफ़ को आश्वासन दिया.

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हुसिफ़ के लिए सलाहकार की व्यवस्था करने अकबर को बीरबल से बेहतर कोई व्यक्ति ना लगा. उन्होंने तुरंत बीरबल को बुलवाया और बोले, “बीरबल! तुम तो जानते ही हो कि हुसिफ़ हमारा दूधभाई है. हम हमेशा उसकी बेहतर जिंदगी चाहते हैं और उसकी हर ख्वाहिश पूरी करना चाहते हैं. उसके एशो-आराम का तो हमने बंदोबस्त कर दिया. अब वो चाहता है कि उसका भी तुम्हारे जैसा सलाहकार हो. तो बस अब तुम अपने भाई जैसा कोई व्यक्ति ले आओ, जो ज्यादा बातूनी न हो. जब भी बोले, नपी-तुली और मतलब की बातें बोले. वह हुसिफ़ को सही सलाह दे. अब ऐसा व्यक्ति ढूंढकर लाना तुम्हारी ज़िम्मेदारी है.”

“जी हुज़ूर.” कहकर बीरबल अकबर का हुक्म बजाने निकल पड़ा.

बीरबल को हुसिफ़ ख़ास पसंद नहीं था. उसकी आदतों के कारण वह उसे किसी लायक नज़र नहीं आता था. भाई होने के नाते अकबर ने उसके एशो-आराम की जो व्यवस्था कर दी थी, वह पर्याप्त थी. अब सलाहकार की मांग बीरबल को उचित नहीं लगी. वह सोच-विचार में चला जा रहा था कि पास ही एक पशुशाला से उसे सांड के रंभाने की आवाज़ आई. फिर क्या? उसके दिमाग की घंटी बज गई.

वह उस सांड को लेकर अकबर के पास पहुँचा. बीरबल के साथ सांड देख अकबर हैरान रह गए और बोले, “बीरबल तुम ये सांड लेकर क्यों आये हो?”

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“जहाँपनाह! आपके कहे अनुसार मैं आपके दूधभाई हुसिफ़ के लिए सलाहकार लेकर आया हूँ. ये सांड और मैं दूधभाई हैं. हमने एक ही माता का दूध पिया है, गौ-माता का. ये ज्यादा बोलता भी नहीं है. यदि कोई इसकी भाषा समझ ले, तो ये सलाह भी बहुत अच्छी देता है. हुसिफ़ को मेरे जैसा सलाहकार चाहिए, तो ये सर्वोत्तम है. आप उसे ये दे दीजिये.”

बीरबल की बात सुनकर अकबर हँस पड़े. उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया. वे समझ गए कि बीरबल जैसा कोई नहीं. बीरबल अनमोल है.      

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