घमंडी तितली की कहानी | Ghamandi Titli Ki Kahani

घमंडी तितली की कहानी | Ghamandi Titli Ki Kahani | Arrogant Butterfly Story In Hindi 

Ghamandi Titli Ki Kahani

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Ghamandi Titli Ki Kahani

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एक हरे-भरे बगीचे में, जहाँ तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूल खिले रहते थे, वहीं एक छोटी सी तितली रहती थी। उसका नाम तारा था। तारा की पंखों पर इंद्रधनुषी रंग थे, जो सूरज की रोशनी में चमकते थे। उसके अद्वितीय रंग और सुंदरता के कारण वह बगीचे में सबसे प्रसिद्ध थी। लेकिन उसकी यह प्रसिद्धि उसे रास नहीं आई और  धीरे-धीरे वह बहुत घमंडी हो गई थी।

तारा को लगता था कि उसके बिना यह बगीचा बिल्कुल बेरंग हो जाएगा। वह अपने मित्रों के साथ बात करना भी बंद कर चुकी थी और हमेशा अकेले उड़ती रहती थी। वह दूसरे जीवों को कमतर समझती थी और अपने आप को सबसे ऊपर मानती थी।

एक दिन तारा एक बड़े गुलाब के फूल पर बैठी थी और अपनी सुंदरता की प्रशंसा कर रही थी। तभी एक छोटी मधुमक्खी, जिसका नाम मनी था, वहाँ आई और उससे कहा, “तारा, क्या तुम मेरी मदद कर सकती हो? मुझे कुछ पराग की आवश्यकता है।”

तारा ने नाराजगी से मनी की ओर देखा और कहा, “तुम्हें नहीं पता कि मैं कितनी खास हूँ? मैं तुम्हारी जैसी साधारण मधुमक्खियों के लिए समय नहीं बर्बाद करती। जाओ यहाँ से!”

तारा का यह व्यवहार देखकर अन्य जीव भी उससे दूर रहने लगे। वह अपनी ही दुनिया में मग्न रहती थी और किसी की भी मदद नहीं करती थी। धीरे-धीरे बगीचे के अन्य तितलियाँ, मधुमक्खियाँ, और कीड़े उससे दूरी बनाने लगे। तारा को अब कोई पसंद नहीं करता था, लेकिन उसके घमंड के कारण उसे इसका एहसास नहीं था।

एक दिन बगीचे में एक नई तितली आई। उसका नाम चांदनी था। चांदनी बहुत ही विनम्र और मिलनसार थी। उसने बगीचे के सभी जीवों से दोस्ती कर ली और उनकी मदद करने लगी। धीरे-धीरे, बगीचे के जीव चांदनी को पसंद करने लगे और तारा को भूलने लगे।

तारा ने यह देखा और उसे बहुत गुस्सा आया। उसने सोचा, “कैसे हो सकता है कि ये जीव चांदनी को मुझसे ज्यादा पसंद करें? मैं तो सबसे सुंदर और खास हूँ।” 

एक दिन बगीचे में एक बड़ा तूफान आया। तेज़ हवा और बारिश ने बगीचे को अस्त-व्यस्त कर दिया। तारा एक फूल पर बैठी थी और तूफान से बचने की कोशिश कर रही थी, लेकिन तेज़ हवा के झोंके ने उसे दूर उड़ा दिया। वह एक कीचड़ भरे गड्ढे में गिर गई और उसके सुंदर पंख गंदे हो गए। वह उड़ नहीं पा रही थी और मदद के लिए चिल्ला रही थी, लेकिन कोई भी उसकी मदद के लिए नहीं आया।

तभी चांदनी ने तारा की आवाज़ सुनी और तुरंत उसकी मदद के लिए पहुँची। उसने तारा को कीचड़ से बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान पर ले गई। तारा ने शर्मिंदगी से कहा, “मुझे माफ करना चांदनी, मैंने हमेशा तुम्हें और दूसरों को नीचा दिखाया है।”

चांदनी ने मुस्कुराते हुए कहा, “कोई बात नहीं तारा, हम सभी एक-दूसरे की मदद के लिए ही हैं। तुम्हें यह समझना होगा कि सच्ची सुंदरता हमारे दिल में होती है, न कि हमारे पंखों में।”

तारा को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने चांदनी से वादा किया कि वह अब घमंडी नहीं बनेगी और सभी की मदद करेगी। उसने बगीचे के सभी जीवों से माफी मांगी और उनसे दोस्ती की। धीरे-धीरे तारा का स्वभाव बदल गया और वह सभी की प्रिय बन गई।

सीख

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि घमंड हमें दूसरों से दूर कर देता है और अकेला बना देता है। सच्ची सुंदरता और मूल्य हमारे व्यवहार और हमारे दिल में होते हैं। हमें हमेशा विनम्र और मददगार होना चाहिए, ताकि हम सभी के दिलों में अपनी जगह बना सकें। तारा की तरह हमें भी अपनी गलतियों से सीखना चाहिए और अपने जीवन को सुंदर और सार्थक बनाना चाहिए।

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