भारी बोझ : अकबर बीरबल की कहानी | Heavy Burden Akbar Birbal Story In Hindi

फ्रेंड्स, इस पोस्ट में हम अकबर बीरबल की कहानी भारी बोझ (Heavy Burden Akbar Birbal Story In Hindi) शेयर कर रहे हैं. इस कहानी में एक गरीब स्त्री बीरबल के पास सहायता के लिए जाती है, जिसकी जमीन पर बादशाह अकबर महल बनाना चाहते हैं. अकबर से सीधे-सीधे कुछ भी कह पाना बीरबल के लिए नामुमकिन था. ऐसे में बीरबल क्या उस स्त्री की मदद कर पाता है? यही हाँ, तो कैसे? यही इस कहानी में बताया गया है. पढ़िए पूरी कहानी (Akbar Birbal Ki Kahani) :

Heavy Burden Akbar Birbal Story In Hindi

Heavy Burden Akbar Birbal Story In Hindi
Heavy Burden Akbar Birbal Story In Hindi

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बादशाह अकबर एक नए महल का निर्माण करने वाले थे, जिसकी तैयारी पूर्ण कर ली गई है और शीघ्र ही भवन निर्माण कार्य प्रारंभ होने वाला था.

लेकिन जिस जमीन पर नया महल निर्मित होने वाला था, वह एक विधवा स्त्री की थी. उसे वह जमीन छोड़ने विवश किया जा रहा था. लेकिन पूर्वजों की जमीन होने के कारण वह उस जमीन को छोड़ना नहीं चाहती थी.

उसने बहुत मिन्नतें की, लकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई. अततः वह बीरबल के पास गई और उसे सारी बात बताकर मदद की गुहार लगाई.

बीरबल ने शांति से उसकी बात सुनी और उसे आश्वासन देकर वापस भेज दिया. उसी शाम उसे सूचना प्राप्त हुई कि दो दिनों में भवन निर्माण प्रारंभ होने वाला है, जिसके लिए भवन-निर्माण सामग्री निर्माण-स्थल पर पहुँच गई, 

अगले दिन बीरबल अकबर के साथ उस जमीन पर पहुँचा. वहाँ मिट्टी के ढेर के पास कई बोर पड़े हुए थे. बीरबल ने एक बोरा उठाया और उसमें मिट्टी भरने लगा.

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यह देख अकबर ने बीरबल से पूछा, “बीरबल! तुम ये क्यों कर रहे हो?”

बीरबल ने उत्तर दिया, “मैं अगले जन्म के लिए कुछ पुण्य कमाना चाहता हूँ. इसलिए ये कर रहा हूँ.”

बीरबल की बात अकबर को समझ नहीं आई. लेकिन उन्होंने उस पर अधिक ध्यान नहीं दिया. वे वहाँ खड़े देखते रहे और बीरबल बोरे में मिट्टी भरता रहा. बोरे में पूरी मिट्टी भर जाने के बाद वह अकबर से बोला, “हुज़ूर! मिट्टी से भरे उस बोरे को उठाकर मेरी पीठ पर रखने में क्या आप सहायता करेंगे.”

अकबर तैयार हो गये और झुककर बोरा उठाने लगे. वह बोरा बहुत भारी था. वे बोले, “बीरबल ये बोरा तो बहुत भारी हैं.”

तब बीरबल ने कहा, “हुज़ूर सोचिये, यदि एक बोरे में भरी मिट्टी का भार इतना अधिक है, तो इस पूरी जमीन की मिट्टी का भार कितना होगा? आपको ये नहीं लगता कि इसका आपके ज़मीर पर जो बोझ आएगा, वो बहुत अधिक होगा. ऐसे में ज़मीर पर इतना भारी बोझ लेकर क्या आप सुकून से जी पाएंगे.”

बीरबल की इस बात ने अकबर की आँखें खोल दी. उन्हें अपनी गलती का अहसास हो गया. उन्होंने उसी समय निर्णय लिया कि वे उस जमीन पर नए महल का निर्माण नहीं करेंगे.

इस तरह बीरबल अपनी सूझबूझ से बादशाह अकबर को मना पाता है.


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