वेडिंग गिफ्ट पति-पत्नि के रिश्ते पर प्रेरक कहानी | Husband Wife Relationship Story In Hindi

फ्रेंड्स, इस लेख में हम वेडिंग गिफ्ट पति-पत्नि के रिश्ते पर प्रेरक कहानी (Wedding Gift Husband Wife Relationship Story In Hindi) शेयर कर रहे हैं. ये पति-पत्नि के रिश्ते पर कहानी है, जो बेहद ख़ूबसूरत और भावनात्मक  है और रिश्तों को संभालने की सीख देती है. आशा है, आपको ये कहानी पसंद आयेगी. पढ़िये Inspiring Story About Husband Wife Relationship In Hindi : 

 Husband Wife Relationship Story In Hindi

 Husband Wife Relationship Story In Hindi
Husband Wife Relationship Story In Hindi

बेटी की शादी का दिन था. विदाई के पहले माँ बेटी के पास गई और उसके हाथ में एक पासबुक रख दिया. चौंककर बेटी ने पूछा, “माँ ये क्या है?”

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माँ बोली, “बेटी, इसे मेरी तरफ़ से अपने लिए एक वेडिंग गिफ्ट समझो. ये एक ‘पासबुक’ है – ‘ज़िंदगी के ख़ूबसूरत लम्हों को संजोकर रखने का पासबुक’. आज तुम्हारी शादी हुई है. आज मैंने बैंक में १००० रुपये जमा कराये हैं और इस पासबुक में इसकी एंट्री भी कर दी है, इन शब्दों के साथ – ‘आज बेहद ख़ुशी का दिन है, आज मेरी बेटी की शादी है’….. “

माँ कहती गई, “…..अब तुम अपनी अपने पति के साथ एक नई ज़िंदगी शुरू करने जा रही हो. अब जब भी तुम दोनों की ज़िंदगी में कोई ख़ुशी का लम्हा आये, तो बैंक अकाउंट में कुछ पैसे जमा कर इस पासबुक में ये ज़रूर लिखना कि किस ख़ुशी के कारण तुमने वे पैसे जमा कराये थे. ख़ुशी जितनी बड़ी हो, पैसे भी उतने ज्यादा जमा करना. जीवन में कुछ पल ठहरकर जब भी तुम दोनों इस पासबुक को देखोगे, तो उन ख़ुशी के लम्हों को दोबारा जी पाओगे.” 

बेटी को माँ का ये उपहार बहुत प्यारा लगा. ससुराल जाने के बाद उसने अपने पति को वह पासबुक दिखाया और माँ की बातें भी बताई. पति बहुत खुश हुआ. उसने सोचा कि जिंदगी के सारे मीठे लम्हों को संजोकर रखने का यह तरीका अजीब ज़रूर है, लेकिन है बहुत प्यारा.

उस दिन के बाद से वे दोनों हमेशा ख़ुशी के नए मौके के इंतजार में रहते, ताकि कुछ पैसे उस बैंक अकाउंट में जमा कर सकें. हर छोटे-बड़े ख़ुशी के मौके पर उन्होंने बैंक में पैसे जमा करवाए और उस पासबुक में एंट्री की.

आज हम दोनों पहली बार डिनर पर गए, इस ख़ुशी में हमने बैंक में २०० रुपये जमा किये.’

‘आज मेरी जॉब लग गई, इस ख़ुशी में मैंने बैंक में ३०० रुपये जमा कराये.’

‘आज मेरी पहली सैलरी मिली, जिससे हमने मिलकर शॉपिंग की और इस ख़ुशी के मौके पर हमने बैंक में ५०० रुपये जमा किये.’

‘आज मेरे पति का प्रमोशन हो गया, आज मेरा जन्मदिन हमने साथ में मनाया, आज हमने अपनी शादी की पहली सालगिरह मनाई. आज हमारे पहले बच्चे का जन्म हुआ’’

इस तरह की कई एंट्री पासबुक में होने लगी और हर मौके पर बैंक में जमा पैसे भी बढ़ने लगे.

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लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा था. पति और पत्नी में दूरियाँ बढ़ती जा रही थी. दोंनों में छोटी-छोटी बातों पर बहस होने लागी, बहस झगड़े में बदलने लगे. कई-कई दिनों तक दोनों में बोल-चाल बंद रहती. स्थिति यहाँ तक पहुँच गई कि दोनों एक-दूसरे से अलग होने के बारे में सोचने लगे. आखिरकार, वह दिन भी आ गया, जब दोनों ने फ़ैसला कर लिया कि वे अब तलाक ले लेंगे.

तलाक फ़ाइल करने के पहले पत्नि अपनी माँ के घर गई और अपना दुखड़ा बताते हुए बोली, “बस माँ अब और नहीं. अब मैं उसके साथ और नहीं रह सकती. कोसती हूँ ख़ुद को कि मैंने उससे शादी की. तलाक ले रही हूँ उससे.”

माँ बोली, “ठीक है! यदि तुम्हें यही सही लगता है, तो मैं तुम्हें नहीं रोकूंगी. लेकिन तुम्हें वो पासबुक याद है ना, जो मैंने विदाई के समय तुम्हें दिया था. तलाक लेने के पहले उस बैंक अकाउंट को बंद कर दो और उसमें जमा सारे पैसे खर्च कर दो. यदि वो शादी इतनी ही बुरी थी, तो उससे जुड़ी कोई याद भी तुम्हें नहीं रखनी चाहिए. पैसे खर्च कर वह पासबुक जला देना.”  

बेटी ने कहा, “हाँ माँ, आप ठीक कहती हैं.”

अगले दिन वो बैंक अकाउंट बंद कराने गई और कतार में लग गई. कतार में खड़े-खड़े उसने यूं ही उस पासबुक का एक पन्ना पलट लिया. एक से दूसरा, फिर तीसरा…पढ़ते-पढ़ते उसकी आँखें डबडबा गई. वे सारे ख़ुशी के लम्हे उसकी आँखों के सामने तैरने लगे, जो उसने अपने पति के साथ गुजारे थे. वह कतार छोड़कर वापस घर चली आई.

घर आकर उसने अपने पति से कहा, “तलाक लेने के पहले इस बैंक अकाउंट को बंद कर देना चाहिए. मैं ये नहीं कर पाई. कल तुम बैंक जाकर अकाउंट बंद करा देना और सारे जमा पैसे खर्च कर देना.”

अगले दिन पति बैंक गया. कतार में खड़े-खड़े उसने भी पासबुक के पन्ने पलट लिए. सारे लम्हों को यादकर उसकी आँखें भी भर आई. वह भी कतार से निकलकर घर आ गया.

घर आकर पासबुक अपनी पत्नी के हाथ में रख दिया. पत्नी ने देखा कि आज की तरीख में बैंक में ५००० रुपये जमा हुए थे और पासबुक में लिखा था कि मुझे आज यह अहसास हुआ है कि जिसे मैं छोड़ने जा रहा था, उसे मैं ज़िंदगी में सबसे ज्यादा प्यार करता हूँ. और अपनी बाकी की ज़िंदगी भी उसी के साथ गुजारना चाहता हूँ.

दोनों की आँखें भर आई. दोनों एक-दूसरे के गले लगकर बहुत रोये. दोनों ने तय किया कि ऐसी छोटी-छोटी बातों पर कभी नहीं झगड़ेंगे.

“शादी का रिश्ता जितना ख़ूबसूरत होता है, उतना ही जटिल भी. इसे निभाना कतई आसान नहीं होता. इस रिश्ते में अलगाव होना स्वाभाविक है, क्योंकि इसमें जुड़े लोग भिन्न परिवेश से आकर जुड़ते हैं. उनकी परवरिश भिन्न वातावरण में हुई होती है, उनका जीवन मूल्य भिन्न होता है. ऐसे में सामंजस्य बिठा पाना आसान नहीं होता.

लेकिन एक-दूसरे की इस भिन्नता को समझकर परिवार बसाना ही तो शादी है. यदि रिश्तों में कुछ दरारें आयें भी, तो उन्हें भूलकर उन लम्हों को याद करें, आपने एक-दूसरे के साथ प्यार से और ख़ुशी से जिये हों. वो लम्हें आपके अंदर छुपी हुई भावनाओं को फिर से ज़िन्दा कर देंगे. किसी भी रिश्तों को अच्छे लम्हों के साथ याद कीजिये, बुरे लम्हों के साथ नहीं. ये रिश्तों को मधुर बना देगा.”

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