मुल्ला नसरुद्दीन और कंजूस पंडित की कहानी | Kanjoos Pandit Mulla Nasruddin Ki Kahani

फ्रेंड्स, इस पोस्ट में हम मुल्ला नसरुद्दीन की कहानी “ग़रीब का झोला” (Kanjoos Pandit Mulla Nasruddin Ki Kahani) शेयर कर रहे हैं. एक कंजूस पंडित मुल्ला नसरुद्दीन से मुफ़्त में काम करवाने की कोशिश करता है, उसका अंज़ाम उसे क्या भुगतना पड़ता है? ये जानने के लिए पढ़िए पूरी कहानी :  

Kanjoos Pandit Mulla Nasruddin Ki Kahani

Kanjoos Pandit Mulla Nasruddin Ki Kahani
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पढ़ें मुल्ला नसरुद्दीन की कहानियों का संग्रह

एक दिन की बात है. मुल्ला नसरुद्दीन टहलता हुआ एक खेत के पास से गुजर रहा था. वह खेत एक कंजूस पंडित का था.

खेत में ढेर सारी सब्जियाँ उगी हुई थी. पंडित वहाँ अपने घर के लिए  सब्जियाँ लेने आया था. उसने पाँच बड़े-बड़े कद्दू एक बोरे में भर लिए. बोरा अच्छा-ख़ासा भारी हो गया था, जिसे घर तक ले जाना पंडित के बस के बाहर था.

वह सहायता के लिए इधर-उधर नज़र दौड़ाने लगा और उसकी नज़र मुल्ला पर पड़ गई. उसने मुल्ला को अपने पास बुलाया और बोला, “पुत्र! यह बोरा मुझे घर तक ले जाना है. मेरी सहायता कर दो.”

मुल्ला ने सोचा इसी बहाने कुछ कमाई हो जायेगी. इसलिए तैयार होकर पूछने लगा, “इस काम के एवज में आप मुझे कितने पैसे देंगे?”

पैसे का नाम सुनते ही कंजूस पंडित हड़बड़ा सा गया. फ़िर संभलते हुए बोला, “पुत्र! मैं पंडित हूँ. धन कहाँ से दूंगा? ज्ञान चाहते हो, तो ले लेना.”

मुल्ला ने सोचा – चलो इसी बहाने कुछ ज्ञान की बातें सुनने को मिल जायेंगी. इसलिए उसने बोरी अपने कंधे पर उठा ली और बोला, “चलिए.”

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पंडित चलने लगा और बोला, “पुत्र, रास्ते में मैं तुम्हें ढेर सारी ज्ञान की बातें बताऊंगा. तुम उनमें इतना डूब जाओगे कि तुम्हें पता ही चलेगा कि रास्ता कब कट गया.”

वो दोनों चलने लगे. पंडित उसे धर्म, ईश्वर और भले-बुरे के ज्ञान की बातें बताने लगा. मुल्ला सारी बातें ध्यान से सुनने लगा. कुछ देर तो पंडित लगातार बोलता रहा. लेकिन, जब वह बोलते-बोलते थक गया, तो चुप हो गया. इधर मुल्ला भी बोरी उठाये-उठाये थक गया और उसने एक जगह बोरी उताकर नीचे रख दी.

जब पंडित ने यह देखा, तो सोचने लगा कि कहीं मुल्ला आधे रास्ते में ही भाग ना जाये. इसलिए बोला, “पुत्र! उस पेड़ तक चलोगे, तो मैं तुम्हें ज्ञान की एक विशेष बात बताऊंगा.”

मुल्ला पंडित की बातें सुनकर ऊब रहा था. लेकिन, फ़िर भी ज्ञान की विशेष बात जानने की जिज्ञासा में उसने बोरी उठा ली और चलने लगा.

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पेड़ के पास पहुँचने पर पंडित बोलने लगा, “पुत्र ज्ञान की पहली बात : यदि कोई तुम्हें कहे कि पैदल चलना गधे की सवारी करने से उत्तम है, तो उसकी बात कभी मत मानना.”

यह सुनकर मुल्ला को बहुत गुस्सा आया कि इसमें ज्ञान वाली कौन सी बात है. उसने फ़िर से बोरी नीचे रख दी. पंडित फ़िर डर गया कि मुल्ला कहीं बीच में ही ना भाग जाए.

वह उसे फुसलाते हुए कहने लगा, “पुत्र! वो जो कुवां दिखा रहा है ना, वहाँ तक चलो, तो मैं तुम्हें वो बात बताऊंगा, जिसे सुनकर जीवन के प्रति तुम्हारा दृष्टिकोण बदल जाएगा.”

मुल्ला ने बोरी उठा ली और कुएं की ओर चलने लगा. पंडित बोलने लगा, “पुत्र! यदि कोई तुम्हें ये कहे कि गरीबी का जीवन अमीरी के जीवन से उत्तम है, तो उसका कभी विश्वास मत करना.”

मुल्ला खड़ा-खड़ा सोचने लगा कि ये बात तो सबको पता है. इसमें ऐसी भी क्या ज्ञान की बात है. उसे बोरी न उठाता देख पंडित बोला, “पुत्र! मेरा घर बस कुछ ही दूरी पर है. वहाँ पहुँचने पर मैं तुम्हें ऐसी ईश्वरीय ज्ञान की बात बताऊंगा कि तुम्हारा जीवन धन्य हो जाएगा.”

मुल्ला ने फ़िर से बोरी उठा ली और चलने लगा. घर पहुँचने पर मुल्ला ने पंडित को देखा, तो पंडित कहने लगा, “पुत्र ज्ञान की तीसरी बात….”

उसकी बात काटकर मुल्ला ही बोल पड़ा, “…मुझे पता है पंडित जी आप क्या कहेंगे और वो ये है कि जो बुद्धिमान है वो मुफ़्त में ही मूर्ख से कद्दू की बोरी उठवा लेता है.”

ये सुनकर पंडित सकपका गया और कुछ बोल न सका. तब मुल्ला बोला, “अब मेरी बात ध्यान से सुनिए पंडित जी. मैं आपको ऐसा दैवीय ज्ञान देता हूँ, जो आज तक आपको किसी ने नहीं दिया होगा. आप अपने घर के नौकर से इस बोरी में रखे कद्दू के बारे में पूछना. यदि वो आपसे ये कहे कि इस बोरी में रखे कद्दू नहीं टूटे हैं, तो आप मुझे सजा दे देना और यदि उसकी बात गलत साबित हो जाये, तो आप उसे नौकरी से निकाल देना.”

ये कहकर मुल्ला ने कद्दू की बोरी एक गड्ढे में फेंक दे और दनदनाता हुआ वहाँ से चला गया. कद्दू चूर-चूर हो गये. पंडित माथा पीटता रह गया. उस दिन उसे एक बड़े पते की बात सीखने को मिली कि ज्यादा कंजूसी और चालूगिरी कभी-कभी नुकसानदायक साबित हो सकती है.


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