लालच बुरी बला : असमिया लोक कथा | Lalach Buri Bala Assam Ki Lok Katha

फ्रेंड्स, इस पोस्ट में हम असम की लोक कथा “लालच बुरी बला” (Lalach Buri Bala Assam Ki Lok Katha) शेयर कर रहे है.  यह लोक कथा तोराली नामक स्त्री और उसके द्वारा जन्मे सांप की है.  पढ़िये पूरी कहानी : 

Lalach Buri Bala Assam Ki Lok Katha

Lalach Buri Bala Assam Ki Lok Katha
Lalach Buri Bala Assam Ki Lok Katha

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असम के एक गाँव में एक रूपवती कन्या रहती थी. उसका नाम तोराली था. गौर वर्ण और घने केशों वाली वह कन्या बहुत सुंदर नृत्य करती थी. बिहुतिली मंच पर उसकी प्रस्तुति पूरे गाँव में चर्चा का विषय रहती और सभी उसकी ख़ूब प्रशंसा करते थे.

तोराली के रूप और गुणों के कारण उसके विवाह के संबंध में प्रस्ताव आने लगे. उसका पिता भी योग्य वह देख उसका विवाह कर देना चाहता था.

एक दिन उसके पास अनंत फुकन नामक युवक विवाह प्रस्ताव लेकर आया. उसके पास धन-धान्य की कोई कमी नहीं थी. तोराली के पिता ने उसका विवाह अनंत से कर दिया.

तोराली विवाह उपरांत अनंत के घर चली गई. उनके कुछ वर्ष सुख से व्यतीत हुए. इस बीच तोराली ने पाँच पुत्रों को जन्म दिया. किंतु, धीरे-धीरे अनंत को व्यवसाय में घाटा होने लगा और उसे अपना व्यवसाय बंद करना पड़ा.

अब वह मेहनत-मजदूरी करके घर की रोजी-रोटी कमा रहा था. किंतु, एक दिन एक पेड़ उसके ऊपर गिर गया और इस दुर्घटना में उसकी आँखें जाती रही. अनंत काम करने लायक नहीं रहा, तो तोराली बाहर जाकर काम करने लगे. वह लोगों के घरों के धान कूटती और किसी तरह अपने घर का गुजारा चलाती.  

तोरली को आशा थी कि उसके पाँचों पुत्र बड़े होकर गुणवान निकलेंगे और घर की ज़िम्मेदारी संभालेंगे. किंतु, इसके विपरीत उसके सभी पुत्र आलसी निकले. तोराली भागवान से प्रार्थना करती कि उन्हें सद्बुद्धि दे और वे योग्य बने और उनके कष्टों का निवारण करें. किंतु, उन्हें भोजन के अतिरिक्त घर की किसी चीज़ से कोई मतलब नहीं था.

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एक दिन तोराली ने मंदिर जाकर भगवान से प्रार्थना की कि उसे एक पुत्र रत्न और प्रदान करे, जो उसका सहारा बने. उसके कुछ दिनों बाद उसने एक साँप को जन्म दिया. साँप को देख तोराली रोने लगी. जन्म उपरांत ही साँप जंगल चला गया.

तोराली के पाँचों बेटों के स्वभाव में कोई परिवर्तन नहीं आया, काम तो वे करते नहीं थे, अब माता-पिता को हर समय ताना देते रहते. साँप को जन्म देने के कारण वे तोरली को नागिन कहने लगे थे. तोरली और अनंत बहुत दु:खी थे और अक्सर अपने छठे पुत्र साँप को स्मरण किया करते थे.

एक रात तोरली को स्वप्न में अपना पुत्र साँप दिखाई पड़ा.

वह अपनी माँ से बोला, “माँ मैं तेरा दुःख हरने प्रतिदिन तेरे पास आऊंगा. तुम मेरी पूंछ का एक इंच काट लेना, वह सोने का हो जाएगा. उसे बेचकर तुम धन की व्यवस्था कर लेना.”

तोराली बोली, “किंतु पुत्र, इससे तुम्हें कष्ट होगा.”

साँप ने आश्वासन दिया, “नहीं माँ, मुझे कोई कष्ट न होगा. तुम निश्चिंत होकर मेरी पूंछ काट लेना.”

सात रातों तक तोराली यही स्वप्न देखती रही. आंठवीं रात उसका पुत्र साँप सच में आ पहुँचा. तोरली ने डरते-डरते चाकू निकाला और उसकी पूंछ का एक इंच टुकड़ा काट लिया. पूंछ कटते ही सोने की बन गई. तोराली ने अपने सर्प पुत्र को एक कटोरा दूध पिलाया और वह वापस जंगल चला गया.

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अगले दिन तोराली वह सोना बेचकर धन जुटाया और घर के आवश्यक सामान ले आई. शाम को अपने पुत्रों की भोजन की थाल में ने पीठा और लड्डू रखा, तो उनकी आँखें चमक गई, पूछने लगे, “इसके लिए पैसे कहाँ से आये?”

तोराली ने झूठ बोल दिया कि वह अपने मायके से पैसे लेकर आई है.

उसके बाद साँप आता रहा और तोराली उसकी एक पूंछ काटती रही. अब उनके घर का खर्च अच्छी तरह चलने लगा. खाने-पीने की कोई कमी न रही. यह देख, उसके पाँचों पुत्रों को संदेह होने लगा.

एक दिन उन्होंने बहुत ज़ोर डाला, तो तोराली को धन प्राप्ति का स्रोत बताना ही पड़ा. यह सुन उसके पुत्रों में लोभ जाग गया. वे धनवान होने का स्वप्न देखने लगे.

वे अपनी माँ से बोले, “तुम्हें उसकी पूंछ से ज्यादा हिस्सा काटना चाहिए. अधिक सोना मिलेगा, तो हम धनवान हो जायेंगे.”

तोराली ने मना किया, तो वे उसे धमकाने लगे और उसकी पिटाई कर दी. वे कहने लगे कि इस बार जब साँप आये, तो उसकी तीन इंच पूंछ काटना. वरना खैर नहीं! तोरली को उनकी बात माननी ही पड़ी.

अगली रात साँप आया और उसें दरवाज़े से आवाज़ दी –

दरवाजा खोलो, मैं हूँ आया
तुम्हारे लिए सोना हूँ लाया
क्या तुमने खाना, भरपेट खाया?

तोराली ने भीतर से उत्तर दिया –

मेरा बेटा जग से है न्यारा

माँ के दुःख, समझने वाला,

क्या हुआ गर इसका रंग है काला

साँप ने घर अंदर प्रवेश किया, तो तोराली ने उसके सामने दोध का कटोरा रख दिया. वह बहुत डरी हुई थी, क्योंकि दरवाज़े की ओट में छिपे उसके पुत्र उसे देख रहे थे. इसलिए उनके कहे अनुसार उसने साँप की तीन इंच पूंछ काट ली. पूंछ कटते ही उसकी पूंछ से रक्त की धार बह निकली, वह तड़प उठा और उसने वहीं दम तोड़ दिया. उसकी पूंछ से काटा गया टुकड़ा भी सोने में परिवर्तित नहीं हुआ.

धन प्राप्त न होने पर उसके पाँचों अपना सिर पीटते रह गए और अपने गुणवान सर्प पुत्र का यह हाल देख तोराली और अनंत रोते रह गए.

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