आर्किड के फूल : अरुणाचल प्रदेश की लोक कथा | Orchid Flower Folk Tale Of Arunachal Pradesh In Hindi

फ्रेंड्स, इस पोस्ट में हम अरुणाचल प्रदेश की लोक कथा “आर्किड के फूल” (Orchid ke Phool Arunachal Pradesh Ki Lok Katha) शेयर कर रहे है.  यह आर्किड फूलों के अस्तित्व में आने की कहानी है.  पढ़िये पूरी कहानी : 

Orchid Ke Phool Arunachal Pradesh Ki Lok Katha

Orchid ke Phool Arunachal Pradesh Ki Lok Katha
Orchid ke Phool Arunachal Pradesh Ki Lok Katha

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बहुत समय पहले की बात है. एक राज्य में एक परोपकारी और वीर राजा शासन करता था. उसका राज्य प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण था. ऊँचे पर्वत, कल-कल करते झरने व नदियाँ और हर-भरे जंगल उसके राज्य की शोभा बढ़ाते थे.

राजा के शासन में समस्त प्रजा सुखी थी. राजा भी अपनी रानी और पुत्री के साथ सुख-पूर्वक जीवन-यापन कर रहा था. किंतु, रानी को इस बात का दुःख था कि वो राजा को पुत्र-रत्न नहीं दे पाई. उसने एक दिन राजा से पुत्र प्राप्ति हेतु दूसरा विवाह कर लेने का निवेदन किया. किंतु, राजा रानी को अत्यधिक प्रेम करता था. उसने उसका यह निवेदन ठुकरा दिया.

वर्ष बीतते गए और राजकुमारी विवाह-योग्य हो गई. वह अपनी माँ की तरह ही रूपवती थी. उसके सौंदर्य के चर्चे दूर-दूर तक फैल गए. पड़ोसी राज्यों के राजकुमार राजा के पास राजकुमारी से विवाह हेतु प्रस्ताव भेजने लगे. किंतु, राजकुमारी विवाह के लिए तैयार नहीं हुई. राजा-रानी ने उसे समझाने का बहुत प्रयत्न किया, किंतु वो नहीं मानी. अंततः राजा-रानी ने हार मान ली.

राजकुमारी प्रतिदिन अपने राजमहल के बगीचे में सखियों के संग समय व्यतीत किया करती थी. वह वहाँ रंग-बिरंगे फूलों को देख आनंदित होती और पक्षियों का कलरव सुन झूम उठती. धूप निकलने तक वह बगीचे में टहलती रहती और धूप चढ़ जाने के बाद महल में वापस आ जाती थी.

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उस बगीचे में स्वच्छ और मीठे जल की एक बावड़ी थी. महल के लोग उसी बावड़ी का जल पीते थे. राजकुमारी प्रतिदिन कुछ देर उस बावड़ी की मुंडेर पर बैठती थी. उस दिन भी राजकुमारी रोज़ की तरह बगीचे में टहल रही थी कि उसे कहीं से तेज दुर्गंध आई. उसने अपनी सखियों को इस बारे में बताया, किंतु किसी की समझ नहीं आया कि दुर्गंध किस ओर से आ रही है. फिर राजकुमारी बावड़ी की मुंडेर पर आकर बैठ गई. किंतु, वहाँ बैठते ही वो अचेत हो गई.

सखियों ने राजा तक राजकुमारी के अचेत होने की ख़बर पहुँचाई. यह ख़बर पाकर राजा दौड़ता हुआ बगीचे में पहुँचा और राजकुमारी को अचेत देख घबरा गया. सखियों ने बताया कि राजकुमारी अचेत होने के पहले किसी दुर्गंध की बात कह रही थीं.

राजकुमारी को उसके कक्ष में ले जाया गया. राज-वैद्य को बुलवाया गया. राज-वैद्य ने बताया कि राजकुमारी के अचेत होने का कारण कोई दुर्गंध है. राजा ने फ़ौरन सिपाहियों को बुलवाया और दुर्गंध का कारण पता करने का आदेश दिया.

सिपाहियों ने पूरे महल और बावड़ी का चप्पा-चप्पा छान मारा, किंतु उन्हें दुर्गंध का कारण पता न चल सका. अंत में एक सिपाही को बावड़ी के पीछे एक मरा हुआ चूहा दिखाई पड़ा. वह चूहा संभवतः किसी पक्षी या बिल्ली के द्वारा वहाँ लाया गया था और आधा खाकर छोड़ दिया गया था.

सिपाहियों ने जब ये बात राजा को बताई, तो राजा ने आदेश दिया कि पूरे राज्य के चूहों को मरवाकर राज्य के बाहर जमीन में गाड़ दिया जाए. सिपाहियों ने राजा के आदेश का पालन किया और राज्य में एक भी चूहा न बचा. किंतु, इसके बाद भी राजकुमारी को होश नहीं आया. राज-वैद्य ने भिन्न-भिन्न प्रकार की औषधियों से राजकुमारी का उपचार किया, किंतु उनका राजकुमारी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और वह होश में नहीं आई. राजा-रानी चिंतित हो गए.

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दिन गुजरते जा रहे थे और राजकुमारी अचेत अवस्था में अपने शयन कक्ष पर शैय्या पर पड़ी हुई थी. उसका चेहरा पीला, होंठ सफ़ेद और आँखों के चारों ओर काले घेरे पड़ गए थे.

इसी तरह एक सप्ताह बीत गया, किंतु राजकुमारी को होश नहीं आया. राजा-रानी को अब ईश्वर की शरण में जाने के सिवाय कोई चारा दिखाई नहीं पड़ा. वो दिन रात ईश्वर से प्रार्थना करने लगे. राज्य की पूरी प्रजा को जब राजकुमारी के बारे में पता चला, तो वे भी ईश्वर की प्रार्थना करने लगे.

एक दिन राजा का दरबार लगा हुआ था, जिसमें राजा, महामंत्री, सेनापति सहित समस्त दरबारी उपस्थित थे. राजा ने राजकुमारी की अवस्था के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए सबसे परामर्श मांगा. तब महामंत्री ने सुझाया कि क्यों ना अपने और आस-पास के राज्यों में मुनादी करवा दी जाए कि जो कोई भी राजुकुमारी को होश में लाएगा, उसे एक लाख सोने की मोहरें पुरूस्कार में दी जाएंगी. राजा को ये परामर्श जंच गया. इसे और आकर्षक बनाकर राजा ने पूरे राज्य में मुनादी करवा दी कि जो भी राजकुमारी को होश में लाएगा, उसे वह आधा राज्य दे देगा.

आधे राज्य के लोभ में दूर-दूर के राज्यों से वैद्य राजा के पास आने लगे और विभिन्न प्रकार की औषधियों से राजकुमारी का उपचार करने का प्रयास करने लगे. किंतु, राजकुमारी की अवस्था जस की तस रही. इसी प्रकार एक माह का समय बीत गया. अब वैद्यों ने भी आना बंद कर दिया. राजा-रानी आस खोने लगे.

तभी एक दिन एक सिपाही ने आकर राजा को सूचना दी कि एक परदेशी युवक राजकुमारी के उपचार के लिए आया है. राजा के मन में पुनः एक आस जाग गई. उसने तत्काल उस युवक को अपने पास बुलवाया.

युवक दरबार में आया और राजा को प्रणाम किया. वह इक्कीस-बाईस वर्ष का एक आकर्षक युवक था. उसने राजा से राजकुमारी की स्थिति के बारे में पूछा, तो राजा ने सारा हाल कह सुनाया कि कैसे राजमहल के बगीचे में टहलते समय अचानक राजकुमारी अचेत हो गई.
तब युवक ने राजा से कहा कि राजकुमारी की शैय्या राजमहल के बगीचे में लगा दी जाए. राजा ने सिपाहियों को आदेश दिया और कुछ ही देर में राजकुमारी की शैय्या बगीचे में लग गई. बसंत का मौसम था. हरे-भरे बगीचे के बीचों-बीच एक वृक्ष के नीचे हल्की धूप में अपनी शैय्या पर राजकुमारी अचेत पड़ी थी. राजा-रानी और सेवक-सविकाएं आस-पास खड़े थे.

कुछ देर में युवक भी वहाँ आ गया. राजकुमारी के पास जाकर उसने एक दृष्टि उस पर डाली, फिर आसमान की ओर सिर उठाकर बुदबुदाते हुए ईश्वर का स्मरण करने लगा. उसके बाद उसने अपनी कमर में बंधी बांसुरी निकाली और बजाने लगा. बांसुरी की सुरीली धुन सुनकर वहाँ उपस्थित सभी लोग मंत्र-मुग्ध हो गए.

सहसा एक चमत्कार हुआ. राजकुमारी जिस वृक्ष के नीचे लेटी थी, उस पर ताज़े-सुगंधित फूल खिलने लगे. वे फूल राजकुमारी पर गिरने लगे. युवक पूरे बगीचे में घूम-घूमकर बांसुरी बजाने लगा. वह जिस भी वृक्ष के नीचे से बांसुरी बजाते हुए गुजरता, वहाँ सुंगधित फूल खिल जाते.

कुछ ही देर में राज-महल के सारे वृक्ष उन सुगंधित फूलों से लद गए. इस बीच राजकुमारी भी अपनी मूर्छा से जाग गई. उसने अपने ऊपर गिरे सुगंधित फूलों को देखा, तो आश्चर्य चकित रह गई. वैसे फूल उस पूरे राज्य में कहीं नहीं थे.

राजा-रानी ने जब राजकुमारी को होश में आया देखा, तो ख़ुशी से फूले न समाए. रानी ने दौड़कर राजकुमारी को गले से लगा लिया. राजा उसका हाल-चाल पूछने लगा. इस बीच किसी को युवक का ध्यान ही नहीं रहा. कुछ देर बाद जब राजा को युवक का ध्यान आया और उसने सेवकों से उसके बारे में पूछा, तो पता चला कि वह चला गया.

उसे हर जगह ढूंढा गया, किंतु वह नहीं मिला. अगले दिन सबसे देखा कि पूरे राज्य के सभी पेड़ों पर वही रंग-बिरंगे सुगंधित फूल महक रहे हैं. उन फूलों की महक पूरे राज्य में फ़ैल रही थी.

कहा जाता है कि बसंत के मौसम में प्रतिवर्ष वह नवयुवक बांसुरी बजाता हुआ वहाँ से गुजरता है और राज्य भर के वृक्ष फूलों से लद जाते हैं और सारा वातावरण उन फूलों की महक से भर उठता है.

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