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क्षमा न करने वाले सेवक का दृष्टांत बाइबल | Parable Of Unforgiving Servant In Hindi 

क्षमा न करने वाले सेवक का दृष्टांत बाइबल (Parable Of Unforgiving Servant In Hindi Bible) यह कहानी बाइबल के “मत्ती” (Matthew) नामक पुस्तक के 18वें अध्याय से ली गई है, जिसे ‘क्षमा न करने वाले सेवक का दृष्टांत’ (Parable of the Unforgiving Servant) कहा जाता है। यह कहानी हमें क्षमा के महत्व और कठोरता के दुष्परिणामों के बारे में सिखाती है।

Parable Of Unforgiving Servant In Hindi

Parable Of Unforgiving Servant In Hindi Bible

बहुत समय पहले, एक राजा था जो अपने राज्य के लोगों के साथ न्यायप्रिय और दयालु था। एक दिन उसने अपने सभी सेवकों के कर्जों का हिसाब लेने का निर्णय किया। राजा का दरबार सजा हुआ था, और वह अपने सिंहासन पर बैठा था। उसके सामने कागजों का ढेर था, जिनमें हर सेवक के नाम के साथ उनके कर्जे लिखे थे। राजा ने अपने एक सेवक को बुलाया, जिस पर एक विशाल कर्ज था – दस हजार स्वर्ण मुद्राओं का। 

जैसे ही वह सेवक राजा के सामने आया, उसके चेहरे पर चिंता और भय साफ झलक रहा था। वह जानता था कि इतने बड़े कर्ज को चुकाना उसके लिए असंभव था। राजा ने अपनी गंभीर आवाज़ में कहा, “तुम पर दस हजार स्वर्ण मुद्राओं का कर्ज है। क्या तुम इसे चुका सकते हो?”

सेवक कांपता हुआ बोला, “महाराज, मैं यह कर्ज कभी नहीं चुका पाऊंगा। कृपया मुझ पर दया करें, मुझे थोड़ा और समय दें।”

राजा ने कुछ पल के लिए सोचा, और फिर उसने गहरी सांस लेते हुए कहा, “मैं तुम पर दया करता हूँ। तुम्हारा सारा कर्ज माफ किया जाता है। जाओ, और अपने जीवन को अच्छे से बिताओ।”

यह सुनकर सेवक की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने राजा के सामने झुककर धन्यवाद किया और खुशी-खुशी महल से बाहर निकला। बाहर आकर उसने महसूस किया कि उसका जीवन एक नई शुरुआत से गुजरेगा, बिना किसी कर्ज के बोझ के।

लेकिन जैसे ही वह सेवक महल से निकला, उसकी नजर अपने एक साथी सेवक पर पड़ी, जो उससे सौ चांदी के सिक्के उधार लिए हुए था। वह तुरंत उसके पास गया और उसे पकड़कर कहा, “मुझे मेरे सौ चांदी के सिक्के तुरंत लौटाओ!”

उस साथी सेवक ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, “कृपया मुझे थोड़ा और समय दो। मैं जल्द ही तुम्हारा कर्ज चुका दूंगा।” 

लेकिन पहला सेवक जरा भी दया नहीं दिखा। उसने उसे घसीटते हुए जेल में डाल दिया और कहा, “तब तक जेल में रहो, जब तक तुम मेरा कर्ज नहीं चुका देते।”

यह देखकर बाकी सेवक बहुत दुखी हुए। उन्होंने तुरंत राजा को जाकर सारी बात बताई। जब राजा को यह बात पता चली, तो वह बहुत क्रोधित हुआ। उसने तुरंत उस पहले सेवक को अपने दरबार में बुलवाया। 

जब सेवक राजा के सामने खड़ा हुआ, तो राजा ने गुस्से में कहा, “तुम दुष्ट सेवक! मैंने तुम्हारा सारा कर्ज माफ कर दिया था, क्योंकि तुमने मुझसे विनती की थी। लेकिन जब तुम्हारे साथी ने तुमसे थोड़ी दया मांगी, तो तुमने उसे माफ करने के बजाय जेल में डाल दिया। क्या तुम्हें अपने साथी के साथ वैसा ही व्यवहार नहीं करना चाहिए था, जैसा मैंने तुम्हारे साथ किया था?”

राजा का गुस्सा अब उबल पड़ा। उसने सेवक को जेल में डालने का आदेश दिया और कहा, “इसे तब तक जेल में रखा जाएगा, जब तक यह पूरा कर्ज न चुका दे।”

सीख

हमें दूसरों के प्रति दयालु और क्षमाशील होना चाहिए। जैसे हमें हमारे गलतियों के लिए क्षमा मिलती है, वैसे ही हमें भी दूसरों को माफ करना चाहिए। कठोरता और बदले की भावना अंततः हमें ही नुकसान पहुंचाती है। क्षमा करना एक महान गुण है, जो हमारे रिश्तों को सशक्त बनाता है और हमें सच्ची शांति की ओर ले जाता है।

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