शेख चिल्ली की खीर कहानी | Shekh Chilli Ki Kheer Ki Kahani

फ्रेंड्स, इस पोस्ट में हम शेख चिल्ली की खीर की कहानी (Shekh Chilli Ki Kheer Ki Kahani) शेयर कर रहे हैं.  ये शेख चिल्ली की मूर्खता का एक मज़ेदार किस्सा है. इस किस्से में शेख चिल्ली चोरों के साथ मिलकर एक घर में चोरी करने जाता है. वहाँ क्या होता है? किस्से में खीर कहाँ से आती है? जानने के लिए पढ़िये शेख चिल्ली की ये मज़ेदार कॉमेडी कहानी (Shekh Chilli Ki Kheer Comedy Story In Hindi):

Shekh Chilli Ki Kheer Ki Kahani

Shekh Chilli Ki Kheer
Shekh Chilli Ki Kheer | Shekh Chilli Ki Kheer

पढ़े शेखचिल्ली की संपूर्ण कहानियाँ  

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शेख चिल्ली निरा मूर्ख था. बातें भी ऐसी करता था कि अच्छे-भले इंसान का सिर चकरा जाए. सबसे ज्यादा वह अपनी माँ को परेशान किया करता था उट-पटांग सवाल पूछ-पूछकर.

एक बार उसने अपनी माँ से पूछा, “माँ मरते कैसे हैं?”

अब माँ क्या जवाब दे? शेख चिल्ली को टरकाने के लिए उसने कह दिया, “आँखें बंद हो जाती हैं और इंसान मर जाता है.”

“ये तो बहुत आसान है.” कहता हुआ चिल्ली घर से बाहर चला गया.

घर से निकलने के बाद शेख चिल्ली घूमता-घामता जंगल चला आया. वहाँ उसने एक पेड़ के नीचे बड़ा सा गड्ढा देखा, तो सोचा क्यों ना मैं आज मर कर देखूं. वह गड्ढे में घुसकर आँखें बंदकर लेट गया.

रात होने पर दो चोर वहाँ आये और उसी पेड़ के नीचे बैठकर बातें करने लगे, जिसके पास गड्ढे में शेख चिल्ली लेटा था.

एक चोर बोला, “चोरी करते समय एक साथी की कमी खलती है. हम तीन होते, तो चोरी करने में सहूलियत रहती. एक घर के सामने पहरा देता, दूसरा घर के पीछे और तीसरा आराम से घर के अंदर घुसकर चोरी करता.”

शेख चिल्ली उनकी बातें सुन रहा था. वह बोला, “दोस्तों! मैं तुम्हारी मदद करना तो चाहता हूँ, लेकिन क्या करूं, मैं तो मरा हुआ हूँ.”

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उसकी आवाज़ सुनकर चोरों ने गड्ढे के अंदर झाँककर देखा, तो शेख चिल्ली को आँखें बंदकर वहाँ लेटा हुआ पाया.

उन्होंने पूछा, “तुम कब मरे दोस्त?”

“आज दोपहर.” शेख चिल्ली बोला, “अब तो रात होने को आई है और मरे-मरे भी मुझे भूख लगने लगी है.”

चोरों को समझते देर न लगी कि ये कोई मूर्ख है. उन्होंने सोचा क्यों ना, इसकी मूर्खता का लाभ उठाकर इससे चोरी करवाई जाये.

वे बोले, “अरे भाई, तुम्हें भूख लगी है, तो चलो हमारे साथ. चोरी करने में हमारी मदद कर देना. बदले में हम तुम्हें दावत देंगे. मरने का क्या है? दावत उड़ा कर मर जाना.”

शेख चिल्ली को बात जम गई, क्योंकि भूख के मारे उसका बुरा हाल हो रहा था और ऊपर से गड्ढे में उसे ठंड भी लग रही थी.

वह दोनों चोरों के साथ हो लिया. तीनों मिलकर गाँव के एक घर में गए. वहाँ एक चोर घर के सामने पहरा देने लगा और दूसरा घर के पीछे. उन्होंने शेख चिल्ली को घर के अंदर चोरी करने भेज दिया.

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रसोई के रास्ते शेख चिल्ली घर में घुसा. वहाँ उसने देखा कि दूध, शक्कर और चांवल पड़ा हुआ है. उसकी भूख बढ़ गई और वह चोरी करने की बात भूलकर खीर बनाने लगा. उसने चूल्हा जलाया और उस पर तपेली चढ़ा दी.

उसी रसोई में एक बूढ़ी औरत सो रही थी. ठंड के कारण वह एक कोने में दुबकी थी. लेकिन चूल्हा जलने से उसे थोड़ी गर्माहट महसूस हुई और वो पसर कर सोने लगी.

शेख चिल्ली की नज़र जब उस पर पड़ी, तो देखा कि उसका हाथ पसरा हुआ है. उसे लगा कि वह औरत खीर मांग रही है. वह बुदबुदाया, “खीर बनी नहीं और मांगने वाले हाज़िर हो गए.”

उसने चूल्हे की आंच तेज कर दी, ताकि खीर जल्दी बन सके. आंच तेज होने से गर्माहट और बढ़ गई. बूढ़ी औरत ने अपने हाथ-पैर और ज्यादा पसार लिए.

ये देख शेख चिल्ली झुंझलाया, “अरे इतनी क्या हड़बड़ी है? खीर बनने तो दो, तुम्हें भी दूंगा. पूरा मैं थोड़े खा जाऊंगा.”

लेकिन गर्माहट बढ़ने के साथ-साथ बूढ़ी औरत का पसरना जारी रहा. शेख चिल्ली को लगने लगा कि वह औरत खीर खाने के लिए बेसब्र हुए जा रही है. इसलिए इतना हाथ पसार रही है. झल्ला कर उसने चम्मच से खीर निकाकर उस औरत के हाथ पर डाल दिया.

गर्म खीर हाथ में पड़ते ही बूढ़ी औरत चीखकर उठ बैठी. उसकी चीख सुनकर घर के लोग भी उठ गए और रसोई की तरफ़ भागे. वहाँ शेख चिल्ली को देख उन्होंने उसे कोतवाल के हवाले करने के लिए पकड़ लिया.

तब शेख चिल्ली बोला, “मुझे क्यों पकड़ रहे हो? जो चोर हैं, वो दोनों तो घर के बाहर है. जाओ जाकर उन्हें पकड़ो.”

इस तरह उसने उन चोरों को भी पकड़वा दिया.

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