विष्णु भगवान की व्रत कथा | Vishnu Bhagwan Ki Vrat Katha

विष्णु भगवान की व्रत कथा (Vishnu Bhagwan Ki Vrat Katha) हम इस पोस्ट में शेयर कर रहे हैं। पढ़िए विष्णु भगवान व्रत कथा का महत्व, पूजा विधि, फायदे आदि की पूरी जानकारी।

विष्णु भगवान हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं, जिन्हें सृष्टि, पालन और संहार के त्रिदेवों में से एक माना जाता है। भगवान विष्णु की उपासना और व्रत कथा का विशेष महत्व है, जिससे भक्तजन उनके कृपा पात्र बनते हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति करते हैं। विष्णु भगवान के व्रत की कथा बहुत ही प्राचीन और पवित्र मानी जाती है। यहां हम विस्तार से विष्णु भगवान की व्रत कथा का विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

Vishnu Bhagwan Ki Vrat Katha

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Vishnu Bhagwan Ki Vrat Katha

विष्णु भगवान व्रत की शुरुआत

बहुत समय पहले की बात है, पृथ्वी पर अत्यधिक पाप और अधर्म बढ़ गया था। सभी देवी-देवता और ऋषि-मुनि चिंतित हो गए और भगवान विष्णु से प्रार्थना करने लगे। भगवान विष्णु ने प्रकट होकर कहा कि धर्म की रक्षा के लिए व्रत और उपवास का पालन करना होगा। तभी से विष्णु भगवान के व्रत की परंपरा आरंभ हुई।

विष्णु भगवान व्रत की विधि

विष्णु भगवान के व्रत की विधि निम्नलिखित है:

1. तैयारी: व्रत के एक दिन पूर्व साधक को सात्विक भोजन करना चाहिए और व्रत के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए।

2. पूजा स्थल की तैयारी : पूजा के लिए एक स्वच्छ स्थान का चयन करें और वहां विष्णु भगवान की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। एक चौकी पर सफेद वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति रखें।

3. संकल्प : भगवान विष्णु के समक्ष धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प आदि अर्पित करते हुए व्रत का संकल्प लें।

4. पूजा विधि : विष्णु भगवान की प्रतिमा को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें वस्त्र, आभूषण और पुष्प अर्पित करें। धूप, दीपक और नैवेद्य (फल, मिठाई) अर्पित करें।

5. कथा वाचन : विष्णु भगवान की व्रत कथा का पाठ करें।

6. प्रसाद वितरण : पूजा के बाद प्रसाद का वितरण करें और स्वयं भी ग्रहण करें।

7. व्रत का पालन : दिनभर उपवास रखें और भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। सांध्यकाल में पुनः पूजा करें और संध्या वंदन करें।

8. व्रत का पारण : अगले दिन प्रातःकाल स्नान कर भगवान विष्णु की आरती कर व्रत का पारण करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें।

विष्णु भगवान की व्रत कथा

प्राचीन समय की बात है, एक नगर में हरिदास नामक ब्राह्मण रहते थे। वे बहुत ही धर्मनिष्ठ और विष्णु भक्त थे। हरिदास प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते और व्रत रखते थे। उनके पास बहुत धन-धान्य नहीं था, लेकिन वे अपने धर्म और भक्ति में अडिग रहते थे।

एक दिन भगवान विष्णु ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर प्रकट होने का निश्चय किया। भगवान विष्णु एक साधारण ब्राह्मण का वेश धारण कर हरिदास के घर गए। हरिदास ने अतिथि का स्वागत किया और भोजन का प्रबंध किया। उस ब्राह्मण ने हरिदास से कहा, “मैं आपकी भक्ति और सेवा से बहुत प्रसन्न हूँ। बताओ, तुम्हें क्या चाहिए?”

हरिदास ने उत्तर दिया, “हे प्रभु, मैं तो आपकी भक्ति में ही संतुष्ट हूँ। लेकिन यदि आप कृपा कर सकते हैं तो मुझे इतना आशीर्वाद दें कि मैं जीवनभर आपकी सेवा कर सकूं और आपके व्रत का पालन कर सकूं।”

विष्णु भगवान ने प्रसन्न होकर कहा, “तथास्तु।” और हरिदास को आशीर्वाद दिया कि वे हमेशा सुखी और समृद्ध रहें और उन्हें विष्णु व्रत का महत्व भी समझाया। हरिदास ने विष्णु भगवान के बताए अनुसार व्रत करना शुरू किया और उनके जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन हुआ।

विष्णु भगवान व्रत का महत्व

विष्णु भगवान के व्रत का पालन करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं, जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। यह व्रत परिवार की खुशहाली के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। विष्णु भगवान की कृपा से भक्त के सभी संकट दूर होते हैं और वह सभी सांसारिक सुखों को प्राप्त करता है। 

विष्णु भगवान व्रत के लाभ

1. धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति : विष्णु भगवान के व्रत से व्यक्ति की धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति होती है।

2. संकटों से मुक्ति : यह व्रत करने से जीवन के सभी संकट और परेशानियां दूर होती हैं।

3. सुख और समृद्धि : भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख और समृद्धि का वास होता है।

4. मानसिक शांति : व्रत और उपासना से मन को शांति मिलती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

निष्कर्ष

विष्णु भगवान का व्रत एक पवित्र और धार्मिक अनुष्ठान है जो व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाता है। इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। उपरोक्त व्रत कथा और विधि का पालन कर भक्तजन भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं।

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