कौवा और मोर की कहानी | The Crow And The Peacock Story In Hindi

फ्रेंड्स, इस पोस्ट में हम कौवा और मोर की कहानी (The Crow And The Peacock Story In Hindi) शेयर कर रहे हैं. ये कहानी एक ऐसे कौवे की है, जो खुद को कोसता रहता था कि वह कौवा क्यों है? काले रंग का, दिखने में कुरूप! वह मोर जैसा सुंदर बनना चाहता है. एक दिन उसे एक स्थान पर मोर के पंख मिले और उसने उसे अपनी पूंछ में बांध लिया और कौवा चला मोर बनने. कहानी में पढ़िये उसके साथ क्या हुआ? 

The Crow And The Peacock Story In Hindi

The Crow And The Peacock Story In Hindi
The Crow And The Peacock Story In Hindi

जंगल में रहने वाला काला कौवा न अपने रूप रंग से संतुष्ट था, न ही अपनी बिरादरी से। वह मोर जैसा सुंदर बनना चाहता था।

जब वह दूसरे कौवे से मिलता, तो कौवों के रूप रंग की बुराई कर अपनी किस्मत को कोसता कि उसने कौवा बनकर इस धरती पर क्यों जन्म लिया। साथी कौवे उसे समझाते कि जैसा रूप रंग मिला है, उसके साथ संतुष्ट रहो। पर वह किसी की बात नहीं मानता और उनसे लड़ता।

एक दिन कौवे को एक स्थान पर बिखरे हुए ढेर सारे मोर पंख दिखाई पड़े। उसने सारे मोर पंख उठाकर अपनी पूंछ में बांध लिये और सोचने लगा कि अब वह भी मोर बन गया है और उसे कौवों की बिरादरी छोड़कर मोरों की बिरादरी में शामिल हो जाना चाहिए।

वह तुरंत वह अपने समूह के सरदार के पास गया और अकड़ कर बोला, “सरदार! जैसा कि आप देख ही रहे हैं, मैं अब मोर बन गया हूँ। इसलिए आपको बताने आया हूँ कि मैं कौवों की बिरादरी छोड़कर मोरों की बिरादरी में जा रहा हूँ।”

कौवों का सरदार उसकी इस गुस्ताखी पर चकित रह गया। वह कुछ नहीं बोला, बस उस कौवे को जाता हुआ देखता रहा।

कौवा मोरों के पास पहुँचा। यह साबित करने के लिए कि वह भी मोर बन गया है, वह उनके सामने अपनी पूंछ दिखा-दिखा कर घूमने लगा। उसकी सोच थी कि वह मोरों से भी सुंदर दिखाई दे रहा है। इसलिए उसे देख मोर उसे अपनी बिरादरी में शामिल होने जरूर बुलायेंगे।

मोरों ने जब उसे मोर पंख अपनी पूंछ में बांधकर घूमते हुए देखा, तो उस पर खूब हँसे। फिर उन्होंने सोचा कि आज इस कौवे का मोर बनने का भूत उतारते हैं। उसके बाद उन्होंने मिलकर कौवे की बहुत धुनाई की। कौवा जान बचाकर भागा और अपने समूह के सरदार के पास पहुँचा।

वह उनसे बोला, “सरदार! मोरों ने मुझे बहुत मारा। अब मैं उनके बीच कभी नहीं जाऊंगा। मैं यहीं अपनी बिरादरी में रहूंगा।”

कौवे के सरदार को उसकी अकड़ याद थी। वह सोचने लगा – ‘बहुत अकड़ रहा था तू। अभी तेरी अकड़ भी उतरता हूँ और सबक भी सिखाता हूँ।‘

उसने अपने साथियों को बुलाया और सबने मिलकर उस कौवे को मार-मार कर अधमरा कर दिया।

कौवे का सरदार बोला, “तुझ जैसे कौवे की हमारे समूह को आवश्कता नहीं। भाग जा यहाँ से और कभी लौटकर मत आना।”

बेचारा कौवा न मोर की बिरादरी में शामिल हो पाया, न अपनी बिरादरी का रहा। मरम्मत हुई, सो अलग।

सीख (Crow And Peacock Story Moral)

हमने जैसे रूप रंग के साथ जन्म लिया है, जिस परिवार और परिवेश में जन्म लिया है, उसका सम्मान करना चाहिए।

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