महात्मा गांधी के 2 प्रेरक प्रसंग | Mahatma Gandhi Ke Prerak Prasang

फ्रेंड्स, इस पोस्ट में हम महात्मा गांधी के प्रेरक प्रसंग (Mahatma Gandhi Ke Prerak Prasang) शेयर कर रहे हैं।  Mahatma Gandhi Ki Prerak Kahaniyan उनके जीवन की कुछ घटनाओं का संकलन है, जो हमें प्रेरणा देने के साथ ही जीवन की सीख देती है. पढ़ें :

Mahatma Gandhi Ke Prerak Prasang
Mahatma Gandhi Ke Prerak Prasang

Mahatma Gandhi Ke Prerak Prasang

उदारता महात्मा गांधी का प्रेरक प्रसंग | Generosity Mahatma Gandhi Ki Prerak Kahani 

उन दिनों महात्मा गाँधी “चरखा संघ” के लिए धन एकत्रित करने शहरों और गाँवों का दौरा कर रहे थे. इसी सिलसिले में वे उड़ीसा दौरे पर पहुँचे. वहाँ एक गाँव में उनका संबोधन कार्यक्रम हुआ. उस सभा में गाँधी जी को सुनने बहुत सारे लोग इकठ्ठे हुए थे.

जब उनका भाषण समाप्त हुआ. तब उस भीड़ में से एक वृद्ध महिला उठ खड़ी हुई. उसकी कमर झुकी हुई थी, बाल सफ़ेद थे और कपड़े कई जगहों से फटे हुए थे. वह गाँधी जी से मिलने मंच की ओर बढ़ने लगी. स्वयंसेवकों के रोकने के बाद भी वह यही रट लगाती रही कि मुझे गाँधी जी से मिलना है.

अंततः वह वहाँ पहुँच ही गई, जहाँ गाँधी जी बैठे हुए थे. वहाँ पहुँचकर उसने गाँधी जी के पैर छुए, फिर अपनी साड़ी के पल्लू में बंधा हुआ तांबे का सिक्का निकाला और उसे गाँधी जी के चरणों में रख दिया. उसके बाद वह मंच से उतर गई.

गाँधी जी ने उस तांबे के सिक्के को उठाकर संभालकर अपने पास रख लिया. उस समय “चरखा संघ” के कोषाध्यक्ष जमनालाल बजाज थे. जब उन्होंने गाँधी जी से उस वृद्धा का दिया हुआ वह तांबे का सिक्का मांगा, तो गाँधी जी ने उसे देने से मना कर दिया.

इस पर जमनालाल बजाज हँस पड़े और बोले, “मैं चरखा संघ का कोषाध्यक्ष होने के नाते कोष के लिए कई हजारों रुपयों का चेक रखता हूँ, लेकिन आप एक तांबे के सिक्के के लिए मुझ पर विश्वास नहीं कर रहे है.”

गाँधी जी ने उत्तर दिया, “इस तांबे के सिक्के की कीमत उन हजारों रुपयों से कहीं अधिक है. लोगों के पास लाखों रुपये होते हैं, तब वे उनमें से हमें एक या दो हजार रुपये दे देते हैं. पर शायद उस गरीब वृद्धा के पास बस यही एक तांबे का सिक्का था और उसने अपनी सारी पूंजी मुझे दे दी. यह उसकी दयालुता है. कितना बड़ा त्याग उसने किया है? इसलिए इस तांबे के सिक्के की कीमत कई करोड़ रुपयों से भी अधिक है.”

सीख – दान का मूल्य देने वाले की उदारता से निर्धारित होता है.

समय अमूल्य है : महात्मा गाँधी का प्रेरक प्रसंग | Time Is Precious Mahatma Gandhi Motivational Story In Hindi

उन दिनों महात्मा गाँधी साबरमती आश्रम में रहा करते थे. एक दिन पास ही के गाँव के कुछ कार्यकर्ता गाँधी जी से मिलने आये. उन्होंने अपने गाँव में एक सभा का आयोजन किया था, जिसमें वे गाँधी जी को संबोधन के लिए आमंत्रित करना चाहते थे.

गाँधी जी ने अपना दूसरे दिन का कार्यक्रम देखा और उन कार्यकर्ताओं से पूछा, “आप लोगों ने कार्यक्रम कितने बजे निश्चित किया है?”

“चार बजे का समय नियत किया गया है.” कार्यकर्ताओं ने जानकारी दी.

गाँधी जी ने आमंत्रण स्वीकार कर लिया.

जाने से पहले एक कार्यकर्ता ने कहा, ”बापू! मैं आपको लेने गाड़ी के साथ एक व्यक्ति को भेज दूंगा ताकि आपको सभा स्थल तक पहुँचने में कोई तकलीफ न हो.”

गाँधी जी ने उन्हें निश्चित समय पर तैयार रहने का आश्वासन दिया. इसके बाद कार्यकर्ता गाँव वापस चले गये.

अगले दिन गाँधी जी समय पर सभा में जाने के लिय तैयार थे. वे गाड़ी की प्रतीक्षा करने लगे. लेकिन पौने चार बजने के बाद भी कोई कार्यकर्ता गाड़ी के साथ उन्हें लेने नहीं पहुँचा. सभा का समय हो रहा था, ऐसे में वे चिंतित हो उठे कि उनके समय पर न पहुँचने पर सबका समय व्यर्थ होगा.

लोगों का समय व्यर्थ न हो, इसका उन्हें एक उपाय सूझा और उन्होंने उस पर अमल किया. कुछ देर बाद गाड़ी लेकर कार्यकर्त्ता जब साबरमती आश्रम पहुँचा, तो गाँधी जी वहाँ से नदारत थे.

उन्हें वहाँ न पाकर वह आश्चर्य में पड़ गया और गाँव लौट आया. वहाँ पहुँचने पर उसने देखा कि गाँधी जी सभा स्थल पर पहुँच चुके हैं और भाषण दे रहे है. उपस्थित सभी लोग बड़े ही ध्यान से गाँधी जी को सुन रहे थे.

सभा समाप्त होने पर वह कार्यकर्ता गाँधी जी के पास गया और उनसे पूछा, “बापू! मैं तो आपको लेने आश्रम गया था, किंतु आप मुझे वहाँ नहीं मिले. आप यहाँ कैसे आये?”

गाँधी जी ने उत्तर दिया, “जब आप पौने चार बजे तक नहीं पहुँचे, तो मैंने साइकिल उठाई और उसे चलाते हुए यहाँ आ गया. मैं अपने कारण इतने लोगों का समय व्यर्थ नहीं करना चाहता था.”

यह बात सुनकर कार्यकर्ता बहुत शर्मिंदा हुआ. तब गाँधी जी ने उसे समय का महत्व समझाते हुए कहा – समय अमूल्य है, इसे व्यर्थ मत गवाओं.

दोस्तों, आपको “Mahatma Gandhi Ke Prerak Prasang” कैसा लगा? आप अपने बहुमूल्य comments के माध्यम से हमें बता सकते है. धन्यवाद.

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