मेहनती चींटी और आलसी टिड्डा की कहानी

फ्रेंड्स, इस पोस्ट में हम मेहनती चींटी और आलसी टिड्डा की कहानी (The Ant And The Grasshopper Story In Hindi Written) शेयर कर रहे हैं. Mehnati Chinti Aur Aalsi Tidda Ki Kahani मेहनत और समय के महत्व पर कहानी है. मेहनती चींटी और आलसी टिड्डे की कहानी से सीख लें और उसे अपने जीवन में अवश्य उतारें. पढ़िये पूरी कहानी :

The Ant And The Grasshopper Story 

The Ant And The Grasshopper Story, चींटी और टिड्डा
Ant And The Grasshopper Story | Ant And The Grasshopper Story

गर्मी का दिन था. सुबह की खिली धूप में एक टिड्डा बड़े मज़े से घास पर फ़ुदक रहा था. वह बड़ा ख़ुश था और उस ख़ुशी में गा रहा था, नाच रहा था और ज़िंदगी के मज़े ले रहा था.

एक ओर जहाँ टिड्डा अपनी मस्ती में लगा हुआ था, वहीं दूसरी ओर एक चींटी अनाज के एक दाने को पीठ पर ढोकर अपने बिल में ले जा रही थी. जब चींटी टिड्डे के पास से गुज़री, तो टिड्डे ने उसे अपने पास बुलाया और कहा, “प्यारी चींटी आओ मज़े करें”

लेकिन चींटी ने मना कर दिया और अपने काम में लगी रही. वह पूरे दिन कड़ी मेहनत कर एक-एककर अनाज का दाना खेत से उठाकर अपने बिल तक ले जाती रही.

अपनी मस्ती में डूबा टिड्डा चींटी को देखता और हँसता. वह बार-बार उसे अपने पास बुलाता और कहता, “प्यारी चींटी, तुम क्यों इतनी मेहनत कर रही हो? आओ, कुछ देर आराम करो, मेरा गाना सुनो. गर्मी के लंबे और उजले दिन है. ऐसे ख़ूबसूरत दिन इस तरह से मेहनत करके हुए क्यों बर्बाद करना?”

चींटी बोली, “मैं ठंड के मौसम के लिए भोजन इकट्ठा कर रही हूँ. मेरी सलाह मानो, तो तुम भी ऐसा ही करो. वरना बाद में पछताओगे.”

“अभी से ठंड के मौसम के बारे में क्यों चिंता करना?” टिड्डा बोला, “मेरे पास पर्याप्त भोजन है और ठंड का मौसम तो अभी बहुत दूर है. उसकी तैयारी करने के लिए बहुत समय है. अभी का समय तो मैं आराम से सोते हुए और मज़े करते हुए बिताना चाहता हूँ. मेरी मानो तो मेहनत छोड़ो और मज़े करो.”

टिड्डे की बात पर ध्यान न देकर चींटी अपने काम में लगी रही. पूरी गर्मी मेहनत कर उसने अपने बिल में ढेर सारा अनाज इकट्ठा कर लिया, जो ठंड के दिनों में उसे काम आने वाला था.

उधर टिड्डा ठंड के मौसम की तैयारी के स्थान पर पूरे दिन नाचता-गाता रहा. अपनी मस्ती में उसे होश ही नहीं रहा कि गर्मी के दिन बहुत लंबे समय तक नहीं रहने वाले हैं. जल्द ही ठंड के दिन और फिर बरसात के दिन आ जायेंगे, जो उस जैसे जीवों के लिए मुश्किल भरे दिन होंगे.

धीरे-धीरे गर्मी चली गई और वसंत का मौसम आ गया. फिर वसंत का मौसम ठंड में तब्दील हो गया. अब तो सूरज बमुश्किल आसमान में नज़र आता. दिन छोटे हो गए और रातें बड़ी हो गई थी. कड़कड़ाती ठंड पड़ने लगी थी और बर्फ़बारी होने लगी थी.

अब टिड्डे को महसूस हुआ कि चींटी सही कह रही थी. उसे भी इस मौसम के लिए पहले से तैयारी करनी चाहिए थी. लेकिन वह तो पूरी गर्मी नाचता-गाता और मज़े करता रहा. अब न उसे गाना गाने का मन कर रहा था, न ही नाचने का. उसका भोजन ख़त्म हो चुका था. वह ठंड और भूख से तड़प रहा था.

उसने सोचा नहीं था कि ठंड इतनी बुरी भी हो सकती है. उसके पास भोजन नहीं था. बर्फ़ से बचने का इंतज़ाम नहीं था. उसे लगने लगा कि जिस गर्मी के मौसम में उसने इतने मज़े किये हैं, शायद अब अगली बार उस मौसम को देखने के लिए वह जिंदा ही न बचे.        

एक दिन भूख से तड़पते हुए बर्फ़ीले मौसम में उसकी नज़र चींटी पर पड़ी, जो अपने बिल में मज़े से आराम कर रही थी. उसके पास पर्याप्त भोजन था और ठंड से बचने के लिए आसरा. टिड्डा पछताने लगा और रोने लगा. उसे समय बर्बाद करने का फ़ल मिल चुका था.

सीख (Moral Of The Story)

समय का सदुपयोग करें, अन्यथा समय हाथ से निकल जाने पर पछतावे के सिवाय कुछ हाथ नहीं आता.

Chinti Aur Tidda Ki Kahani Video

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