मेहमान की पहचान : अकबर बीरबल का रोचक किस्सा | Akbar Birbal Ke Kisse

मित्रों, “akbar birbal ke kisse’ में आज हम आपको जो कहानी बता रहे हैं, उसमें एक व्यक्ति बीरबल को दावत पर बुलाकर उसकी परीक्षा लेता है. बीरबल कैसे उस परीक्षा में सफ़ल होता है और अपनी अक्लमंदी साबित करता है, यही इस “akbar birbal story” में बताया गया है. पढ़िये पूरी कहानी :

Akbar Birbal Ke Kisse

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akbar birbal ke kisse
akbar birbal ke kisse | Source : Akbar Birbal PNG

एक बार नगर के धनी व्यक्ति ने बीरबल (Birbal) को दावत पर बुलाया. बीरबल नियत तिथि को दावत पर पहुँचा. मेजबान ने बीरबल का ख़ूब जोशो-ख़रोश से स्वागत किया.

घर के भीतर प्रवेश करने पर बीरबल ने देखा कि दावत के लिए बहुत से लोग आये हुए हैं. बीरबल (Birbal) को ज्यादा भीड़भाड़ पसंद नहीं थी. उसने धनी व्यक्ति से कहा, “मुझे नहीं पता था कि तुमने ढेर सारे मेहमानों को बुलवाया है.”

“महाशय! मैं जानता हूँ कि आपको ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगह जाना पसंद नहीं है. इसलिए मैंने आपके अलावा बस एक ही मेहमान बुलाया है. अन्य व्यक्ति मेरे कर्मचारी हैं.” मेजबान बोला.

“अच्छा!” बीरबल सिर हिलाते हुए बोला.

“महाशय! आपकी अक्लमंदी के किस्से पूरे नगर में मशहूर हैं. मैं चाहता हूँ कि आप अपनी अक्लमंदी दिखाते हुए यहाँ उपस्थित व्यक्तियों में से उस मेहमान को पहचानें, जिसे मैंने दावत पर बुलवाया है.” मेजबान बीरबल की अक्लमंदी की परीक्षा लेने के प्रयोजन से बोला.

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“ठीक है. लेकिन पहले तुम यहाँ उपस्थित लोगों को कोई चुटकुला सुनाओ. मैं इन्हें कुछ देर गौर से देखूंगा. फिर आपको बता दूंगा कि इन सबमें मेहमान कौन है?” बीरबल सहजता से बोला.

बीरबल की बात मानकर मेजबान ने दावत में आये लोगों को एक चुटकुला सुनाया. चुटकुला ख़त्म होने के बाद वहाँ उपस्थित लोग ठहाके मारकर हँसने लगे.

“क्या अब आप उस मेहमान (Guest) को पहचान सकते हैं?” मेजबान ने बीरबल से पूछा.

“बिल्कुल” कहते हुए बीरबल के एक व्यक्ति की ओर इशारा किया. मेजबान हैरान रह गया.

“आपने इतने व्यक्तियों में से एक मेहमान को कैसे पहचान लिया?” उसने पूछा.

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“बहुत ही आसान था. आपने जो चुटकुला (Joke) सुनाया, वह मेरे द्वारा अब तक सुने गए सारे चुटकुलों में सबसे बुरा था. उसके बाद भी यहाँ उपस्थित सभी लोग जोर-जोर से हँसने लगे. लेकिन एक व्यक्ति नहीं हँसा. मैं समझ गया कि वही मेहमान है. क्योंकि मालिक के बुरे से बुरे चुटकुलों पर हँसना कर्मचारियों का फ़र्ज़ होता है. उस फ़र्ज़ को निभाते हुए आपके सारे कर्मचारी हँसे, लेकिन मेहमान नहीं और मैं उसे तुरंत पहचान गया.”


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